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देशभर में उल्लास के साथ मनाया गया विक्रम संवत 2083 का आगमन, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

ANC वार्ता डेस्क, नई दिल्ली, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ अवसर पर देशभर में हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 का स्वागत भक्ति, उत्साह और परंपराओं के संगम के साथ किया गया। इस पावन अवसर पर सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर नव वर्ष के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कई राज्यों में मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचने लगे थे। कई स्थानों पर विशेष आरती, हवन, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।

धार्मिक नगरी वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर नव संवत्सर की शुरुआत की। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर को भव्य रूप से सजाया गया, जहां रामलला के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रातःकालीन भस्म आरती के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसमें शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचे।

महाराष्ट्र में इस दिन को “गुड़ी पड़वा” के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने अपने घरों के बाहर गुड़ी स्थापित कर इसे विजय और समृद्धि का प्रतीक माना। वहीं कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में “उगादी” के रूप में नव वर्ष का स्वागत किया गया। इस अवसर पर घरों में विशेष पकवान बनाए गए और परिवार के साथ त्योहार मनाया गया।

राजस्थान और गुजरात में भी नव संवत्सर के अवसर पर सांस्कृतिक झांकियां और शोभायात्राएं निकाली गईं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं और महिलाओं ने कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कई स्थानों पर लोक नृत्य और संगीत कार्यक्रमों ने उत्सव को और भी आकर्षक बना दिया।

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी मंदिरों में विशेष आयोजन हुए। नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन करने का अवसर मिला।

इस अवसर पर कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सेवा कार्यों का आयोजन भी किया। जगह-जगह भंडारे लगाए गए, प्रसाद वितरण किया गया और जरूरतमंदों को भोजन एवं वस्त्र वितरित किए गए। कुछ संगठनों ने स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किए।

धर्माचार्यों के अनुसार, विक्रम संवत 2083 का आगमन केवल एक नए वर्ष की शुरुआत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्योतिष और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है। यह समय वसंत ऋतु का होता है, जब प्रकृति नवजीवन से भर उठती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्रद्धालुओं में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। “नव वर्ष हमारे जीवन में नई उम्मीदें लेकर आता है। हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि सभी के जीवन में सुख और शांति बनी रहे,” एक श्रद्धालु ने कहा।

कुल मिलाकर, विक्रम संवत 2083 का आगमन देशभर में आस्था, उल्लास और सामाजिक समरसता के साथ मनाया गया। यह पर्व भारतीय संस्कृति की जीवंतता और परंपराओं की गहराई को दर्शाता है। नव संवत्सर के इस शुभ अवसर पर लोगों ने नए संकल्प लिए और एक बेहतर, समृद्ध और खुशहाल भविष्य की कामना की।

ANC Varta

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