दिल्ली: जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में सीजेपी के दो नेता जेल भेजे गए, तीसरे को मिली रिहाई
Ancवार्ता,ब्यूरो,नई दिल्ली जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। पार्टी के तीन नेताओं आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया, जबकि अजिंक्य शिंदे को बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया। सौरव दास को तिहाड़ की जेल नंबर 2 और आशुतोष रांका को जेल नंबर 4 में रखा गया है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के अगले ही दिन, मंगलवार को सीजेपी के करीब 20 कार्यकर्ता तिरंगा लेकर वहां पहुंच गए थे। कार्यकर्ताओं ने जदयू कार्यालय का गेट पार किया और भारी बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन स्थल पर तिरंगा फहराया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका, सौरव दास और राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे समेत कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
पेशी से पहले सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी थी कि तीनों नेताओं को जंतर-मंतर मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन पर बिना अनुमति प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
अजिंक्य शिंदे ने सरकार पर लगाए आरोप
रिहाई के बाद सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने आरोप लगाया कि पार्टी के नेताओं को केवल तिरंगा फहराने और ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाने के कारण जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। शिंदे के मुताबिक, आशुतोष रांका को उनके जन्मदिन के दिन ही जेल जाना पड़ा।
शिंदे ने सरकार पर लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने और अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जेल भेजे जाने से पार्टी के नेता डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की।
वकील ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सीजेपी नेताओं की ओर से पेश वकील अभिष्ट हेला ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस आशंका के आधार पर नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की कि वे भविष्य में कोई अपराध कर सकते हैं। वकील के अनुसार, पुलिस ने अदालत में दावा किया कि नेताओं ने लोगों को जंतर-मंतर पहुंचने के लिए बुलाया था, जबकि उनकी ओर से ऐसा कोई आह्वान नहीं किया गया था।
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि नेताओं ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया था और कनॉट प्लेस से जुड़ी एक अलग शिकायत का इस मामले में गलत इस्तेमाल किया गया।
दिल्ली पुलिस ने क्या बताया?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सीजेपी के कार्यकर्ताओं पर बार-बार सार्वजनिक शांति भंग करने, कानून का उल्लंघन करने और सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरे लोगों को भी कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियों के लिए उकसाने की कोशिश करने के आरोप हैं। पुलिस ने बताया कि शुरुआत में 14 लोगों को हिरासत में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की गई थी। मामले में 13 अक्टूबर को दो एफआईआर दर्ज की गईं।
पहली एफआईआर संख्या 289/26 कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(ए), 332 और 61(2) के तहत दर्ज की गई। दूसरी एफआईआर संख्या 128/26 पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) के तहत दर्ज हुई।
पुलिस के अनुसार, तीनों नेताओं को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत कार्यवाही शुरू की गई। पुलिस ने भविष्य में भी कानून का उल्लंघन किए जाने की आशंका जताई। इसके बाद अदालत ने आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वहीं, अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये का निजी मुचलका और जमानत बांड भरने के बाद छह महीने तक शांति और अच्छा आचरण बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया गया।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर विवाद
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले का सीजेपी विरोध कर रही है। पार्टी ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अधिकार पर चोट बताया है। सीजेपी के प्रतिनिधि सोमवार को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे और पुलिस को पत्र सौंपकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की थी। पार्टी के अनुसार, उसने पुलिस से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा था। इसी दिन जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला सामने आया।
लोगों की आवाज नहीं दबाई जा सकती: अभिजीत दिपके
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रशासन जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर सकता है, लेकिन लोगों की आवाज नहीं दबा सकता। दिपके ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब पुलिस की कार्रवाई, नेताओं की न्यायिक हिरासत और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के मुद्दे पर केंद्रित हो गया है।

