महाशिवरात्रि में करें, गन्ने के रस से अभिषेक मिलेगा का विशेष धन का वरदान
फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी इस बार आस्था और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत विशेष मानी जा रही है। 15 फरवरी 2026 की शाम से आरंभ हो रही महाशिवरात्रि पर वर्षों बाद कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। धर्मनगरी Haridwar और देहरादून सहित पूरे उत्तराखंड में शिवालयों में तैयारियाँ जोरों पर हैं।
एक साथ कई शुभ योगों का संयोग
इस वर्ष कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात जैसे दुर्लभ योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ऐसा संयोग वर्षों बाद देखने को मिल रहा है, जिससे इस दिन किए गए जप-तप और पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है।
नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी बताते हैं कि भगवान शिव की त्रिगुणी सृष्टि है—सात्विक, राजसिक और तामसिक। श्रद्धालु जिस भाव से पूजा करता है, उसे उसी प्रकार का फल प्राप्त होता है।
तीन प्रकार की पूजा का महत्व
गृहस्थ जीवन जीने वाले अधिकतर श्रद्धालु सात्विक और राजसिक पूजा करते हैं।
-
सात्विक पूजन में दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, पुष्प और फल अर्पित किए जाते हैं।
-
राजसिक पूजन में भांग, धतूरा, रुद्राक्ष और कमल पुष्प चढ़ाए जाते हैं।
-
तामसिक साधना में अघोर पद्धति से भस्म श्रृंगार और भस्म आरती की जाती है।
माना जाता है कि महाशिवरात्रि की पावन रात्रि में किया गया हर प्रकार का पूजन विशेष फलदायी होता है।
कब से कब तक रहेगी चतुर्दशी
कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को शाम 5:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी, सोमवार को शाम 5:34 बजे तक रहेगी। चूंकि चतुर्दशी तिथि रात्रि में पड़ रही है, इसलिए 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा।
चार प्रहर की पूजा का विशेष विधान
शास्त्रों में महाशिवरात्रि की रात्रि को चार प्रहर में बांटकर पूजन करने का विशेष महत्व बताया गया है—
-
प्रथम प्रहर: 15 फरवरी शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक
-
द्वितीय प्रहर: 15 फरवरी रात 9:23 बजे से 16 फरवरी रात 12:34 बजे तक
-
तृतीय प्रहर: 16 फरवरी रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक
-
चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से सुबह 6:59 बजे तक
इसके अतिरिक्त निशीथ काल पूजा 16 फरवरी रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक अत्यंत शुभ मानी गई है।
ऐसे करें विशेष उपाय
-
पाँच बिल्वपत्रों पर ‘राम’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करने से धन संबंधी कष्ट दूर होते हैं।
-
तीन पत्तों पर केसर और चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर अर्पण करने से पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
अभिषेक से मिलेगा मनचाहा फल
-
दूध से अभिषेक: मानसिक शांति
-
गन्ने के रस से: धन प्राप्ति
-
सरसों के तेल से: शत्रु नाश
-
गिलोय रस से: आरोग्य लाभ
-
गंगाजल से: शिव भक्ति की वृद्धि
महाशिवरात्रि केवल व्रत और अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शिव कृपा पाने का दुर्लभ अवसर है। इस वर्ष बन रहे अद्भुत शुभ योग इसे और भी दिव्य बना रहे हैं। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से पूजन कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि और शांति की कामना कर सकते हैं।

