37 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का पूर्ण द्विपक्षीय दौरा
ANC वार्ता , ब्यूरो , नई दिल्ली ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चार दिवसीय तीन देशों के विदेश दौरे के तहत सबसे पहले जॉर्डन पहुंच गए हैं, जहां उनका भव्य और गर्मजोशी से स्वागत किया गया। अम्मान एयरपोर्ट पर स्वयं जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन पीएम मोदी को रिसीव करने पहुंचे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो भारत–जॉर्डन संबंधों की गहराई और आपसी सम्मान को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि 37 वर्षों के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह जॉर्डन का पूर्ण द्विपक्षीय दौरा है। यह दौरा ऐसे महत्वपूर्ण समय में हो रहा है, जब भारत और जॉर्डन के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं। कूटनीतिक दृष्टि से यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है।
हुसैनिया पैलेस में उच्चस्तरीय मुलाकात
जॉर्डन पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हुसैनिया पैलेस में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन से मुलाकात की। यह बैठक अत्यंत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत–जॉर्डन द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय हालात और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, शांति एवं स्थिरता से जुड़े मसलों और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।
भारत–जॉर्डन संबंधों को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत और जॉर्डन के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। जॉर्डन पश्चिम एशिया में भारत का एक अहम और भरोसेमंद साझेदार रहा है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक सहयोग के साथ-साथ रक्षा, सुरक्षा और मानवीय सहयोग लगातार बढ़ता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करेगी, बल्कि भारत की पश्चिम एशिया नीति को भी मजबूती प्रदान करेगी। साथ ही, यह दौरा क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।
तीन देशों की यात्रा का पहला पड़ाव
जॉर्डन, प्रधानमंत्री मोदी के तीन देशों के चार दिवसीय दौरे का पहला पड़ाव है। इसके बाद वे अन्य देशों की यात्रा करेंगे, जहां उच्चस्तरीय बैठकों और समझौतों के माध्यम से भारत के वैश्विक संबंधों को और विस्तार देने की योजना है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का जॉर्डन दौरा ऐतिहासिक, प्रतीकात्मक और रणनीतिक—तीनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

