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ग्रेटर नोएडा के एक निजी विश्वविद्यालय के मेस के खाने में निकले कीड़े….

ग्रेनो की यूनिवर्सिटी में छात्रों का फूटा गुस्सा, बोले– 1.70 लाख रुपये लेकर परोसा जा रहा है घटिया खाना
ANCVarta | ग्रेटर नोएडा | 

ग्रेटर नोएडा स्थित बेनेट यूनिवर्सिटी में मेस के भोजन में कीड़े मिलने का मामला सामने आने के बाद छात्र समुदाय में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा है कि लाखों रुपये फीस और मेस चार्ज देने के बावजूद उन्हें मानकहीन और अस्वच्छ भोजन परोसा जा रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें छात्रों ने खाने में मौजूद कीड़ों को साफ तौर पर दिखाया है।

वायरल वीडियो बनाने वाले छात्र का कहना है कि वह हर साल करीब 1.70 लाख रुपये सिर्फ खाने और हॉस्टल सुविधाओं के लिए जमा करते हैं। इसके बावजूद जिस गुणवत्ता का भोजन उन्हें दिया जाता है, वह न केवल निराशाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। छात्र का आरोप है कि पिछले कई दिनों से भोजन की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

सोशल मीडिया पर यह मामला तूल पकड़ते ही छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी। समाजवादी पार्टी छात्र सभा के अध्यक्ष मोहित नागर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतनी महंगी फीस लेने के बाद भी छात्रों को कीड़े वाला भोजन दिया जाना शर्मनाक और अस्वीकार्य है। “यह छात्रों की सेहत के साथ खिलवाड़ है। प्रशासन को तत्काल जिम्मेदारों पर कार्रवाई करनी चाहिए,” मोहित नागर ने पोस्ट में लिखा।

यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि बीते कई महीनों से मेस का खाना औसत दर्जे से भी नीचे रहा है। सब्जियों में मिट्टी, दाल में बदबू और चावल में कीड़े जैसे मामले सामने आते रहे हैं। छात्रों ने बताया कि प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ औपचारिक आश्वासन दिया गया। “हम मेस शुल्क के रूप में इतनी बड़ी रकम भरते हैं ताकि हमें साफ-सुथरा और पौष्टिक खाना मिले। लेकिन वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक है,” एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

वीडियो वायरल होने के बाद छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई है। कई छात्र अब सामूहिक विरोध की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन खाद्य गुणवत्ता की गारंटी नहीं देता और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तब तक विरोध जारी रहेगा। कुछ छात्र माता-पिता को भी शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकता है।

दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच के लिए आंतरिक कमेटी बनाने पर विचार किया जा रहा है। छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए प्रशासन दबाव में है और जल्द ही कोई कदम उठ सकता है।

फिलहाल, यह घटना एक बार फिर निजी विश्वविद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता, मेस शुल्क और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है। छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ तथा गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

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