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ग्रेटर नोएडा में छठ महापर्व की भव्य छटा, कुलेसरा पुस्ता घाट पर उमड़ी श्रद्धा की लहर

ANC वार्ता की ब्यूरोचीफ रोशनी शंकर ने व्रतियों से की खास बातचीत

ANC वार्ता, ग्रेटर नोएडा।
सूर्य उपासना का सबसे पवित्र पर्व छठ महापर्व आज पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व के तीसरे दिन यानी संध्या अर्घ्य के अवसर पर रविवार को ग्रेटर नोएडा के कुलेसरा पुस्ता घाट पर आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी हाथों में पूजा की टोकरी और बांस के सूप लिए घाट की ओर जाती दिखाई दीं।

कुलेसरा पुस्ता घाट पर भक्तों ने घाट की सीढ़ियों पर रंगोली बनाई, दीप जलाए और सूर्य देव को अर्घ्य देने की तैयारी की। घाट का दृश्य पूर्णतः आध्यात्मिक हो उठा। लोकगीतों और पारंपरिक छठ गीतों की गूंज से पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब गया। महिलाएं “कांचा ही बांदर छठी मइया” और “उठे सुगवा भागे सुगवा” जैसे गीत गुनगुनाती नज़र आईं।

इस मौके पर ANC वार्ता की महानगर ब्यूरोचीफ रोशनी शंकर ने छठ व्रतियों से बातचीत की। उन्होंने व्रतियों से उनके अनुभव, संकल्प और इस पर्व के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की। व्रतियों ने बताया कि छठ व्रत सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि आत्मसंयम, त्याग, और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह पर्व सूर्य और प्रकृति की ऊर्जा के प्रति आभार व्यक्त करता है, जो जीवन के संतुलन के लिए आवश्यक है।

व्रतियों ने बताया कि छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इसके बाद खरना और फिर दो दिन के कठोर निर्जला व्रत के बाद संध्या और उषा अर्घ्य के साथ व्रत संपन्न होता है। उनका कहना था कि “छठ मइया हर कष्ट हर लेती हैं और परिवार में सुख-शांति लाती हैं।”

ग्रेटर नोएडा प्रशासन की ओर से सुरक्षा और स्वच्छता की विशेष व्यवस्थाएँ की गई थीं। घाट पर पुलिस बल और स्वयंसेवक लगातार मौजूद रहे। नगर निगम द्वारा सफाई अभियान चलाया गया और मेडिकल टीमों को भी तैनात किया गया।

इस बार छठ पर्व की एक खास बात यह रही कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी देखने को मिली। कई श्रद्धालुओं ने मिट्टी और प्राकृतिक सामग्रियों से बने दीपक और पूजन सामग्री का उपयोग किया। लोगों ने अपील की कि भविष्य में भी छठ घाटों की स्वच्छता बनाए रखी जाए।

ANC वार्ता की रिपोर्टर रोशनी शंकर ने बताया कि छठ पर्व केवल बिहार या पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद जैसे शहरी क्षेत्रों में भी इस पर्व का महत्व तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा, “छठ की छटा अब देश की सीमा पार कर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संस्कृति की पहचान बन चुकी है।”

घाटों पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि परंपराएं तब जीवंत रहती हैं, जब नई पीढ़ी उन्हें अपने दिल से अपनाती है।

कल सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस चार दिवसीय पर्व का समापन होगा। श्रद्धालु परिवार की खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना के साथ अगले वर्ष फिर इसी भक्ति भाव से छठ मनाने का संकल्प लेंगे।

ANC Varta

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