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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का केस दर्ज !

कोर्ट के आदेश पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का केस, प्रयागराज में दर्ज FIR, POCSO समेत गंभीर धाराएं लागू!

ANC वार्ता, ब्यूरो, प्रयागराज। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ कथित यौन शोषण के गंभीर आरोपों में प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई इलाहाबाद जिला अदालत की पॉक्सो (POCSO) स्पेशल कोर्ट के आदेश के बाद की गई है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिससे धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह एफआईआर प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज की गई है। अदालत ने दो कथित पीड़ितों, जिनमें एक नाबालिग बताया गया है, के आरोपों को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच के लिए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने धार्मिक आश्रम और शिविरों में अपने शिष्यों का यौन शोषण किया।

एफआईआर में दो से तीन अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जाएंगे और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

FIR में लगाए गए गंभीर आरोप

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि यह घटनाएं 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच हुईं। शिकायत के अनुसार, धार्मिक आयोजनों—विशेषकर कुंभ मेला 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान लगे शिविरों में कथित रूप से यौन शोषण की घटनाएं हुईं। आरोप है कि पीड़ितों का शोषण आश्रम परिसर और शिविर के बाहर खड़ी गाड़ी में भी किया गया।

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि पीड़ित लंबे समय तक डर और दबाव में रहे, जिसके कारण उन्होंने तुरंत शिकायत नहीं की। बाद में उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद न्यायालय ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के अलावा पॉक्सो एक्ट की धारा 3, 4(2), 5, 6, 16 और 17 सहित अन्य गंभीर प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है। ये धाराएं नाबालिगों के यौन शोषण और उससे जुड़े अपराधों से संबंधित हैं और इनमें कठोर सजा का प्रावधान है।

पुलिस ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच सावधानीपूर्वक की जा रही है और आवश्यक होने पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को बताया साजिश

मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी आरोपों को निराधार और साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि आरोप लगाना अलग बात है, लेकिन उसे साबित करना अलग है। उन्होंने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।

स्वामी के शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने भी आरोपों का खंडन किया और कहा कि यह उनके गुरु की छवि खराब करने की साजिश है। उन्होंने शिकायतकर्ता पर भी सवाल उठाए और आरोपों को बेबुनियाद बताया।

धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में बढ़ी चर्चा

इस मामले के सामने आने के बाद धार्मिक जगत और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ धार्मिक नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं कुछ समर्थकों ने इसे स्वामी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बताया है।

पुलिस जांच जारी, अभी गिरफ्तारी नहीं

पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। फिलहाल किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ दर्ज यह मामला धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर के बाद अब पुलिस जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। जहां एक ओर पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी ओर आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की अपील की है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे।

ANC Varta

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