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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने की डिप्टी सीएम केशव की तारीफ

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने की डिप्टी सीएम केशव की तारीफ, बोले— ऐसे व्यक्ति को ही सीएम बनाना चाहिए!

ANCवार्ता ब्यूरो, प्रयागराज, 25 जनवरी। संगम की रेती पर आयोजित माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर उपजा विवाद शनिवार को भी शांत नहीं हुआ। त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने पिछले छह दिनों से धरने पर बैठे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम का बयान समझदारी भरा है और ऐसे ही व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था। उनका मानना है कि यदि प्रदेश की कमान ऐसे विवेकशील नेतृत्व के हाथों में होती, तो हालात और बेहतर होते।

डिप्टी सीएम के बयान को बताया संतुलित और जिम्मेदार

शनिवार को मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा पूरे मामले के पटाक्षेप की बात कहे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका सीधा अर्थ यही है कि कहीं न कहीं अधिकारियों से चूक हुई है। उन्होंने कहा, “डिप्टी सीएम ने जो कहा, वह एक जिम्मेदार और समझदार व्यक्ति का बयान है। सच को स्वीकार करना ही समाधान की दिशा में पहला कदम होता है।” शंकराचार्य ने यह भी कहा कि केशव प्रसाद मौर्य ने जनता और संत समाज की भावना के अनुरूप बात रखी है।

‘ऐसे व्यक्ति को सीएम बनाना चाहिए था’

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी को ऐसे ही समझदार व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश का नेतृत्व विवेकशील और संवादपरक होता, तो इस तरह के विवाद उत्पन्न ही नहीं होते। उनके इस बयान के बाद माघ मेले में मौजूद संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

वसंत पंचमी पर भी नहीं किया संगम स्नान

माघ मेले के चौथे स्नान पर्व वसंत पंचमी के अवसर पर भी शंकराचार्य ने संगम स्नान नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन द्वारा गंगा स्नान से रोके जाने के बाद से उनके लिए उसी दिन का मुहूर्त अभी तक चल रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें ससम्मान संगम में गंगा स्नान नहीं कराया जाता, तब तक उनका यह संकल्प जारी रहेगा।

प्रशासन से अब तक नहीं हुआ कोई संपर्क

शंकराचार्य ने कहा कि इस पूरे विवाद की शुरुआत मेला प्रशासन की ओर से हुई थी, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से उनसे कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “हम शिविर के बाहर खुले में बैठे हुए हैं। क्या कुछ हो रहा है, यह आप लोग बेहतर जानते हैं।” उनके इस बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रशासन और संत समाज के बीच संवाद की कमी बनी हुई है।

पुरी शंकराचार्य के स्नान पर दिया स्पष्ट बयान

पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती द्वारा वसंत पंचमी पर बिना पालकी के स्नान करने के सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि यह पूरी तरह उनकी व्यक्तिगत इच्छा का विषय है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की इच्छा पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा सकता। न तो उन्हें यह कहा जा सकता है कि वे पैदल जाएं और न ही यह कि वे पालकी में ही बैठें। यह उनका अधिकार है और उसका सम्मान होना चाहिए।

तबीयत बिगड़ने की दी जानकारी

अपने स्वास्थ्य को लेकर शंकराचार्य ने शनिवार को बताया कि पूरब की हवा में अधिक देर तक बैठे रहने से उन्हें कुछ थकान महसूस हुई थी। उन्होंने कहा कि सावधानी के तौर पर उन्होंने अपने आप को ढक लिया है और अब उनकी तबीयत ठीक है। उन्होंने अपने समर्थकों और शिष्यों से चिंता न करने की अपील भी की।

गोप्रतिष्ठा यात्रा एक दिन स्थगित

गोप्रतिष्ठा यात्रा को लेकर शंकराचार्य ने बताया कि वसंत पंचमी के अवसर पर माघ मेले में अत्यधिक भीड़ को देखते हुए शनिवार को यात्रा स्थगित की गई थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रविवार से गोप्रतिष्ठा यात्रा पुनः अनवरत रूप से जारी रहेगी।

समाधान की उम्मीद, लेकिन धरना जारी

कुल मिलाकर 25 जनवरी को भी माघ मेले में शंकराचार्य और मेला प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। हालांकि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान के बाद संत समाज में यह उम्मीद जरूर जगी है कि जल्द ही इस प्रकरण का सम्मानजनक समाधान निकलेगा। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने साफ कहा है कि जब तक उन्हें ससम्मान संगम स्नान नहीं कराया जाता और भविष्य के लिए ठोस व स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

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