पूर्वोत्तर राजनीति राज्य / क्षेत्रीय

मिज़ोरम में रेल सेवा-विकास की नई सुबह…

साप्ताहिक लेख

डॉ.अनुज, स्तंभकार

भारत एक विशाल देश है और यहां के अलग-अलग क्षेत्रों का सामाजिक-आर्थिक विकास भौगोलिक परिस्थितियों और साधनों की उपलब्धता पर काफी हद तक निर्भर करता है। उत्तर-पूर्वी राज्य, विशेषकर मिज़ोरम, लंबे समय से देश की मुख्यधारा से भौगोलिक रूप से कुछ हद तक कटे हुए रहे हैं। सड़क मार्ग और सीमित हवाई सेवाओं के कारण यहां की जनता को परिवहन, व्यापार और रोजगार के अवसरों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा मिज़ोरम में रेल सेवा की शुरुआत राज्य के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम साबित होगी। यह केवल परिवहन सुविधा का विस्तार नहीं है, बल्कि एक नए सामाजिक-आर्थिक युग का उद्घाटन है।

आज के युग में उपभोक्ता उत्पादों का बाजार बहुत बड़ा है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन और औद्योगिक मशीनरी—इन सबमें ऑन-साइट वारंटी दी जाती है। यानी किसी भी समस्या की स्थिति में कंपनी का इंजीनियर ग्राहक के घर या कार्यालय जाकर समाधान करता है। लेकिन मिज़ोरम जैसे राज्यों में, जहां अब तक रेल सेवा का अभाव रहा है, असम अथवा गुवाहाटी से इंजीनियर को बुलाना एक बड़ी चुनौती रहा है। लंबी दूरी, अधिक यात्रा खर्च और समय की बर्बादी उपभोक्ताओं को परेशान करती थी। अब जब रेल सेवा शुरू हो गई है तो आईजॉल जैसे शहरों में कंपनियों की फ्रेंचाइज़ी और सर्विस सेंटर खुलना आसान होगा। इससे न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि उपभोक्ताओं को समय पर और किफ़ायती सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

आज भारत के महानगरों और बड़े शहरों में किराना, फल-सब्ज़ी, दवा, कपड़े, टैक्सी सेवा, भोजन और जलपान जैसी सुविधाएं बस मोबाइल एप पर एक क्लिक से उपलब्ध हो जाती हैं। जोमैटो, स्वीगी, बिगबास्केट, अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं को घर बैठे सुविधा प्रदान कर रहे हैं। मिज़ोरम की राजधानी आईजॉल में इन सेवाओं की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन दूर-दराज़ के इलाकों तक इनकी पहुंच सीमित रही है। रेल सेवा के बाद इन ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन प्रबंधन आसान हो जाएगा। अब मिज़ोरम के सुदूर गांवों और कस्बों तक भी यह सेवाएं पहुंच सकेंगी। इससे उपभोक्ताओं के जीवन स्तर में सुधार होगा और स्थानीय उद्यमियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।

मिज़ोरम में आज भी परंपरागत ढंग से बनाए गए मकान बहुतायत में मिलते हैं। स्थानीय संसाधनों और कम लागत में बनाए गए ये मकान वहां की संस्कृति और जीवनशैली के प्रतीक हैं। किंतु विकास की इस नई बयार के साथ आईजॉल सहित अन्य शहरों में बहुमंजिला इमारतें तेजी से खड़ी हो रही हैं। इसका अर्थ है कि आने वाले समय में मिज़ोरम शहरीकरण की नई राह पर अग्रसर होगा। रेलवे के माध्यम से सीमेंट, लोहे, मशीनरी और निर्माण सामग्री आसानी से पहुंच सकेगी, जिससे इमारत निर्माण की गति और बढ़ेगी। इससे न केवल आवास संकट का समाधान होगा बल्कि रोजगार और निवेश की संभावनाएं भी प्रबल होंगी।

रेल सेवा के शुभारंभ से मिज़ोरम के लोगों की यात्रा पहले की तुलना में काफी आसान और आरामदायक हो जाएगी। अब तक लोग टाटा सूमो जैसी पारंपरिक गाड़ियों से लंबी और कठिन यात्राएं करने के लिए मजबूर थे। यह यात्रा न केवल अधिक समय लेने वाली थी बल्कि थकानभरी भी होती थी। दूसरी ओर हवाई यात्रा सुविधाजनक तो थी, लेकिन महंगी पड़ती थी। रेल सेवा के माध्यम से अब लोगों को एक सस्ता, सुरक्षित और आरामदायक विकल्प मिल गया है। इससे छात्रों, व्यापारियों, पर्यटकों और आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ होगा।

रेलवे के आगमन से मिज़ोरम में व्यापार और उद्योग के नए अवसर खुलेंगे। यहां के बांस, अदरक, संतरे, अनानास, कॉफी और अन्य कृषि उत्पाद अब देश के बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। हस्तशिल्प और बुनाई के उत्पाद, जो अब तक सीमित बाजार तक ही सिमटे थे, अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना पाएंगे। रेल सेवा के कारण माल ढुलाई सस्ती और तेज़ हो जाएगी, जिससे स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी। इसके साथ ही फ्रेंचाइज़ी, रिटेल और सर्विस सेक्टर के बढ़ने से युवाओं को व्यापक रोजगार के अवसर मिलेंगे।

मिज़ोरम के कुछ लोग इनर लाइन परमिट (ILP) को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि बाहरी लोगों के बड़े पैमाने पर आगमन से स्थानीय संस्कृति और पहचान पर असर पड़ सकता है। यह चिंता स्वाभाविक है। लेकिन केंद्र सरकार और विशेषकर मोदी सरकार ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसीलिए ILP प्रणाली को बनाए रखा जाएगा ताकि स्थानीय लोगों के हित सुरक्षित रहें और बाहरी निवेश केवल राज्य के विकास और सहयोग के लिए हो।

रेल सेवा का प्रभाव केवल आर्थिक या भौतिक विकास तक सीमित नहीं रहेगा। यह सामाजिक-सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा। देश के विभिन्न हिस्सों से लोग मिज़ोरम आ सकेंगे और यहां की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित होंगे। पर्यटन उद्योग को गति मिलेगी और स्थानीय लोग भी भारत के अन्य हिस्सों तक आसानी से पहुंच पाएंगे। इससे एक ओर राष्ट्रीय एकता और सद्भावना मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर मिज़ोरम की विशिष्ट पहचान को भी व्यापक मंच मिलेगा।

मिज़ोरम में रेल सेवा का शुभारंभ केवल एक परिवहन परियोजना नहीं है, बल्कि यह राज्य के सुनहरे भविष्य का ब्रह्ममुहूर्त है। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि रोजगार, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन सभी क्षेत्रों में व्यापक विकास होगा। ऑन-साइट वारंटी और तकनीकी सेवाओं की चुनौती, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं का विस्तार, बहुमंजिला भवनों का निर्माण, किसानों और उद्यमियों की आय में वृद्धि, पर्यटन का विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान—ये सभी इस परियोजना के प्रत्यक्ष लाभ होंगे।

मोदी सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम मिज़ोरम के लोगों को न केवल भारत की मुख्यधारा से जोड़ देगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में सक्रिय भागीदार भी बनाएगा। निश्चय ही यह विकास की नई गाथा है, जो मिज़ोरम के हर घर और हर परिवार की आकांक्षाओं को नई उड़ान देगी।

(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक पूर्वोत्तर मामलों के जानकार हैं)

 

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