प्रेरणा विमर्श–2025: नवोत्थान के नए क्षितिज पर तीन सत्रों में गहन मंथन
रोशनी शंकर, INCवार्ता, नोएडा महानगर ब्यूरो
प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वावधान में नोएडा के सेक्टर-62 स्थित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान में आयोजित ‘प्रेरणा विमर्श–2025’ के दूसरे दिन नवोत्थान के नए क्षितिज विषय पर देश के प्रख्यात लेखकों, विचारकों, कूटनीतिज्ञों और रक्षा विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श किया। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में वैचारिक, वैश्विक और रक्षा—तीनों क्षेत्रों में भारत के नवोत्थान से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। इस अवसर पर पिछले वर्ष के प्रेरणा विमर्श पर आधारित पुस्तक ‘पंच परिवर्तन’ का भी विमोचन किया गया।
वैचारिक नवोत्थान पर पहला सत्र
कार्यक्रम के प्रथम सत्र का विषय ‘मंत्र विप्लव (वैचारिक क्षेत्र में नवोत्थान)’ रहा। इस सत्र की प्रमुख वक्ता राज्यसभा सांसद एवं विख्यात इतिहासकार मीनाक्षी जैन ने कहा कि पिछले दस वर्षों में देश के बौद्धिक और वैचारिक वातावरण में बड़ा परिवर्तन आया है। उन्होंने अयोध्या से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले प्रकाशक दबाव में रहते थे और ऐसे विषयों पर पुस्तकें प्रकाशित करने से कतराते थे, लेकिन आज वही प्रकाशक उन्हें पुस्तक लिखने के लिए आमंत्रित करते हैं। यह बदलाव देश की वैचारिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास का संकेत है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने कहा कि दशकों की सांस्कृतिक गुलामी से बाहर निकलने का संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने इसे भारत के नवोत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रतिबिंब शर्मा ने किया, जिन्होंने “विचारों के क्षेत्र में तकनीक—चुनौती या अवसर” विषय पर संवाद को रोचक और ज्ञानवर्धक बनाया।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में नवोत्थान
दूसरे सत्र का विषय ‘वसुधैव कुटुंबकम (वैश्विक क्षेत्र में नवोत्थान)’ रहा। पूर्व राजदूत सुशील कुमार सिंघल ने कहा कि जब तक भारत अपनी सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर विदेश नीति, अनुसंधान और आर्थिक नीतियां तय नहीं करेगा, तब तक औपनिवेशिक सोच से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाएगा। उन्होंने आत्मनिर्भर और स्वदेशी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार नरेश कुमार कुमावत ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विदेशों में भी भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों और मूर्तिकला के प्रति रुचि बढ़ी है। इस सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा ने किया, जिन्होंने वैश्विक संबंधों पर दोनों वक्ताओं से सारगर्भित संवाद किया।
रक्षा क्षेत्र में नवोत्थान पर तीसरा सत्र
तीसरे सत्र का विषय ‘शस्त्रेण रक्षति: राष्ट्रे (रक्षा क्षेत्र में नवोत्थान)’ रहा। सेवानिवृत्त मेजर जनरल विजय शरद रानाडे ने कहा कि युद्ध की परिभाषा और रणनीति दोनों बदल चुकी हैं। उन्होंने बताया कि भारत अब रक्षात्मक सोच से आगे बढ़कर आक्रामक और तकनीक-आधारित रणनीति अपना रहा है। ड्रोन, मिसाइल और साइबर क्षमताओं ने युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है।
रक्षा विशेषज्ञ राजीव नयन ने कहा कि चीन जैसी चुनौतियों का सामना केवल हथियारों से नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और रणनीतिक सोच से भी करना होगा। उन्होंने स्वदेशी तकनीक और संयमित शक्ति प्रदर्शन पर जोर दिया। सत्र का संचालन नेटवर्क-18 के प्रबंध संपादक आनंद नरसिम्हन ने किया, जिन्होंने शत्रु-बोध के साथ आत्म-बोध की आवश्यकता को रेखांकित किया।
सम्मान और सहभागिता
कार्यक्रम के दौरान प्रेरणा सम्मान–2025 टाइम्स नाउ की ग्रुप एडिटर इन चीफ नविका कुमार को प्रदान किया गया। हर सत्र के अंत में वक्ताओं ने श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्ष प्रीति दादू, प्रेरणा विमर्श–2025 के अध्यक्ष अनिल त्यागी, समन्वयक श्याम किशोर सहाय सहित 300 से अधिक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

