ANC वार्ताम ब्यूरो, मेरठ
मेरठ के चर्चित कपसाड़ कांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। अपहरण के मुख्य आरोपी पारस सोम को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया है। संयुक्त कार्रवाई में मेरठ और सहारनपुर पुलिस ने अपहृत दलित युवती रूबी को भी सुरक्षित बरामद कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस मामले ने बीते तीन दिनों से प्रदेश की राजनीति को गरमा रखा था, जिस पर अब गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद नया मोड़ आ गया है।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि अपहरण में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा युवती को किन रास्तों से हरिद्वार ले जाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है।
क्या है कपसाड़ कांड
कपसाड़ गांव में गुरुवार को आरोप है कि युवती की मां सुनीता की हत्या कर दी गई थी और इसके बाद बेटी रूबी का पारस सोम ने अपने साथियों के साथ अपहरण कर लिया। घटना के बाद से आरोपी फरार थे और युवती की बरामदगी न होने से तनाव बढ़ता जा रहा था। तीन दिन तक चली अनिश्चितता के बीच पुलिस पर दबाव लगातार बढ़ता रहा।
सड़कों पर उतरा विपक्ष, गांव सील
इस प्रकरण को लेकर शनिवार को दिनभर राजनीतिक घमासान देखने को मिला। विभिन्न राजनीतिक दलों ने कपसाड़ कूच की कोशिश की, लेकिन कानून-व्यवस्था के मद्देनज़र पुलिस ने गांव की सीमाएं सील कर दीं। रामजी लाल सुमन, अतुल प्रधान और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद सहित कई नेताओं को काशी टोल प्लाजा और सिवाया टोल पर रोक दिया गया।
रोक-टोक के दौरान धक्कामुक्की, तीखी नोकझोंक और धरना-प्रदर्शन भी हुआ। कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, राष्ट्रीय सचिव प्रदीप नरवाल और सांसद तनुज पूनिया को भी पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया, जिसके बाद उन्होंने कई घंटे धरना दिया।
भाजपा नेताओं की पीड़ित परिवार से मुलाकात
दूसरी ओर, भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम और नेता सुनील भराला ने गांव पहुंचकर मृतका सुनीता के परिजनों से मुलाकात की और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
आगे क्या
पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी और युवती की सुरक्षित बरामदगी के बाद अब पूरे नेटवर्क की जांच तेज की जाएगी। हत्या, अपहरण और साजिश की धाराओं में केस मजबूत किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, जबकि विपक्ष इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़ा हुआ है। कपसाड़ कांड में अब कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी—दोनों के और तेज होने के संकेत हैं।

