दिल्ली में AAP और छात्र संगठनों ने भी उठाई आवाज
Ancवार्ता, ब्यूरो, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का सिलसिला तेज होता जा रहा है। रविवार को मुंबई में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से बड़ा विरोध मार्च निकाला। वहीं दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) और छात्र संगठनों ने भी चुनाव आयोग तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रदर्शन किया।
मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समर्थक सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
मेट्रो स्टेशन से महानगरपालिका भवन तक मार्च
मुंबई में प्रदर्शन की शुरुआत मेट्रो स्टेशन के पास से हुई। इसके बाद उद्धव और राज ठाकरे के नेतृत्व में समर्थकों ने करीब दो किलोमीटर तक पैदल मार्च किया। प्रदर्शन में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बड़ी संख्या मौजूद रही।
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में की गई SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार किसकी बनेगी, इसका फैसला जनता और मतदाताओं को करना चाहिए, चुनाव आयोग को नहीं।
राज ठाकरे ने यह भी कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया और सत्ता के इस्तेमाल के तरीके को लेकर है।
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में केंद्र सरकार का प्रभाव बढ़ गया है।
उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का दावा भी किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची को लेकर उठ रहे विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें विपक्ष के निशाने पर बताया। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए हैं और इनके संबंध में संबंधित संवैधानिक संस्थाओं का पक्ष अलग हो सकता है।
SIR को लेकर विपक्ष का विरोध
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं।
दिल्ली में AAP और छात्र संगठनों का प्रदर्शन
मुंबई के अलावा दिल्ली में भी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर के आसपास विरोध मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
छात्र संगठनों ने भी SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा सहित छात्र संगठन के कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और SIR से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की।
चुनाव आयोग पर लगातार बढ़ रहा राजनीतिक दबाव
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर पिछले कुछ दिनों में राजनीतिक विरोध तेज हुआ है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। इन दावों के सामने आने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इन दावों और आरोपों को लेकर चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष इस पूरे विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान
इस बीच CJP से जुड़े अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर को सोशल मीडिया के माध्यम से 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर से लोग दिल्ली पहुंचेंगे।
उन्होंने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने और महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर आंदोलन करने की बात कही है।
तीन दिनों में कई जगह विरोध
ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ पिछले तीन दिनों में मुंबई और दिल्ली समेत विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन देखने को मिले हैं। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों की सक्रियता से यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है।
आने वाले दिनों में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है। साथ ही, इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा।

