509 महिलाएं और 191 नाबालिग शामिल; चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने
ANCवार्ता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वर्ष 2026 की शुरुआत बेहद चिंताजनक तस्वीर लेकर आई है। जनवरी के पहले सिर्फ 15 दिनों में ही 800 से अधिक लोगों के लापता होने का मामला सामने आया है। Delhi Police के आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच कुल 807 लोग लापता हुए, यानी औसतन हर दिन करीब 54 लोग राजधानी से गायब हो गए। इन आंकड़ों ने न सिर्फ प्रशासन, बल्कि समाज को भी झकझोर कर रख दिया है।
509 महिलाएं-लड़कियां, 191 नाबालिग
दिल्ली पुलिस के डेटा के मुताबिक, लापता लोगों में 509 महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं, जबकि 298 पुरुष भी इस अवधि में गायब हुए। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि कुल मामलों में 191 नाबालिग शामिल हैं। इनमें 146 लड़कियां हैं, जो महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
आंकड़ों के अनुसार, इस 15 दिन की अवधि में औसतन हर दिन 13 बच्चे लापता हुए। पुलिस अब तक 235 लोगों को खोजने में सफल रही है, लेकिन 572 लोग अभी भी लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
नाबालिगों के मामलों में हालात और गंभीर
नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों में स्थिति और भी चिंताजनक है। पुलिस के अनुसार, लापता बच्चों में से केवल 29 लड़कियां और 19 लड़के ही अब तक खोजे जा सके हैं। यानी लगभग 71 प्रतिशत नाबालिग (121 बच्चे) अब भी लापता हैं।
आयु वर्ग के अनुसार देखें तो:
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8 से 12 वर्ष की उम्र के 13 बच्चे लापता हुए, जिनमें 8 लड़के और 5 लड़कियां शामिल हैं। इनमें से सिर्फ 3 लड़कों का ही पता चल सका।
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8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की बात करें तो 9 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 3 लड़के मिल गए, जबकि 6 बच्चे अब भी लापता हैं।
ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है।
वयस्क भी बड़ी संख्या में लापता
जनवरी के पहले पखवाड़े में लापता हुए लोगों में वयस्कों की संख्या सबसे अधिक रही। कुल 616 वयस्क लापता हुए, जिनमें 363 महिलाएं और 253 पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने इनमें से 90 पुरुषों और 91 महिलाओं को खोज लिया है, लेकिन अब भी 435 वयस्कों का कोई पता नहीं चल पाया है।
2025 के आंकड़े भी डराने वाले
यदि पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति और भी गंभीर नजर आती है। वर्ष 2025 में दिल्ली में कुल 24,508 लोग लापता हुए थे। इनमें से 14,870 महिलाएं थीं, यानी कुल मामलों का 60 प्रतिशत से ज्यादा। पुरुषों के 9,638 मामले दर्ज किए गए थे।
दिल्ली पुलिस ने 2025 में 15,421 लोगों को खोजने में सफलता हासिल की, लेकिन 9,087 मामले अब भी अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि हर साल हजारों परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
एक दशक में 2.32 लाख से ज्यादा लापता
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2016 से 2026 के बीच के एक दशक में दिल्ली में 2,32,737 लोग लापता हुए। इनमें से करीब 1.8 लाख लोगों का पता लगाया गया, लेकिन अब भी करीब 52,000 मामले अनसुलझे हैं। यह ट्रेंड साफ तौर पर बताता है कि राजधानी में लापता लोगों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।
पुलिस की चुनौती, समाज के लिए चेतावनी
दिल्ली पुलिस का कहना है कि लापता लोगों की तलाश के लिए तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और राज्यों के बीच समन्वय जैसे उपाय किए जा रहे हैं। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में मामलों का अनसुलझा रहना एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—मानव तस्करी, घरेलू हिंसा, सामाजिक दबाव, आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और अपराधी गिरोहों की सक्रियता। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों का बड़ी संख्या में लापता होना, राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
साफ है कि दिल्ली जैसे महानगर में लापता लोगों के बढ़ते मामले सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकट बनते जा रहे हैं। आंकड़े चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।
राजधानी में हर दिन औसतन दर्जनों लोगों का गायब होना न सिर्फ प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी।

