दिल्ली MCD उपचुनाव: भाजपा को दो सीटों का नुकसान, कांग्रेस का खाता खुला; आप ने तीनों सीटें बरकरार रखीं
रोशनी शंकर, महानगर ब्यूरो, ANCवार्ता
दिल्ली नगर निगम (MCD) के हाल ही में संपन्न हुए उपचुनावों के नतीजों ने राजधानी की राजनीति में नया संतुलन स्थापित कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उसकी सीटें घटकर 9 से 7 रह गई हैं। यह नुकसान ऐसे समय में आया है जब पार्टी विधानसभा चुनावों से पहले राजधानी में अपनी पकड़ मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही थी। दूसरी ओर, लंबे समय से निगम में हाशिये पर चल रही कांग्रेस ने इन उपचुनावों में आखिरकार एक सीट जीतकर अपना खाता खोल लिया, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपनी मजबूती दिखाते हुए तीनों सीटों पर जीत बरकरार रखी है।
इन उपचुनावों में कुल चार सीटों पर मतदान हुआ था—जिनमें से तीन सीटें पहले से AAP के पास थीं, जबकि एक सीट कांग्रेस को मिली है। BJP एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी, जिससे पार्टी के भीतर चिंता बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन नतीजों को सिर्फ उपचुनाव तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह दिल्ली के मतदाताओं की मौजूदा प्राथमिकताओं और स्थानीय मुद्दों की ओर इशारा करते हैं।
AAP ने अपने मजबूत संगठन, स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता, मोहल्ला स्तर पर जुड़ाव और साफ-सफाई तथा स्थानीय विकास के मुद्दों को लगातार उठाकर चुनावी बढ़त बनाए रखी। पार्टी के नेताओं ने दावा किया कि यह जीत उनके कामकाज की पुष्टि है और जनता ने उन्हें दुबारा मौका देकर विकास मॉडल में भरोसा जताया है। आप कार्यकर्ताओं के अनुसार, दिल्ली में स्थानीय निकाय स्तर पर पार्टी की पकड़ अभी भी मजबूत है और यह आने वाले चुनावों में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
उधर, कांग्रेस के लिए यह नतीजा राहत लेकर आया है। कई वर्षों से निगम राजनीति में अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही पार्टी ने एक सीट जीतकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अब भी मुकाबले में मौजूद है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इसे ‘वापसी की शुरुआत’ करार दिया है। कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता इस जीत को पार्टी के संगठन विस्तार और जमीनी स्तर पर नए सिरे से काम करने का परिणाम बता रहे हैं।
हालांकि, भाजपा के लिए यह उपचुनाव नतीजा चिंता का विषय है। नगर निगम में मजबूत उपस्थिति रखने वाली BJP की सीटें घटने से पार्टी की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे नतीजों की समीक्षा करेंगे और संगठन स्तर पर बदलावों तथा बूथ संरचना को मजबूत करने पर फोकस करेंगे। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बीजेपी स्थानीय मुद्दों पर अपेक्षित रूप से आक्रामक नहीं दिखी, जिसका असर उपचुनावों में देखने को मिला।
इन उपचुनावों के नतीजे आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जहां AAP इसे 2025 के बड़े चुनावों से पहले एक सकारात्मक संकेत मान रही है, वहीं भाजपा आगामी चुनावों में बेहतर रणनीति बनाकर वापसी करने की बात कह रही है। कांग्रेस की नजर भी इस जीत को आगे बढ़ाकर अपने खोए जनाधार को वापस पाने पर रहेगी।
कुल मिलाकर, MCD उपचुनाव ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि दिल्ली की राजनीति में स्थानीय मुद्दों, जमीनी कार्यकर्ताओं की ताकत और जनता से सीधा संवाद निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

