Trending अंतरराष्ट्रीय राजनीति

भारत ने अफगानिस्तान को सौंपी एंबुलेंसों की खेप

पड़ोसी देशों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण
नई दिल्ली, ब्यूरो, ANCवार्ता

भारत ने अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को मजबूती से आगे बढ़ाते हुए अफगानिस्तान को एंबुलेंसों की एक महत्वपूर्ण खेप सौंपी है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब क्षेत्रीय राजनीति तेज़ी से बदल रही है और पड़ोसी देशों के साथ भारत के रिश्तों में नए स्वरूप उभर रहे हैं। जहां एक ओर बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी तत्वों की गतिविधियों से भारत-विरोधी बयानबाजी बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान ने भारत के साथ सहयोग और सम्मानजनक संबंधों की परंपरा बनाए रखी है। इसी पारस्परिक विश्वास का परिणाम है कि भारत अफगान लोगों की मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आगे आया है।

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इन एंबुलेंसों को सौंपने का वादा कुछ महीने पहले नई दिल्ली में आयोजित उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान किया गया था। अफगानिस्तान की गंभीर मानवीय स्थिति, विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, को देखते हुए भारत ने इस प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देते हुए सहायता को तुरंत भेजने का निर्णय लिया। मंत्रालय ने कहा कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के पहुंच न पाने से सबसे ज्यादा आम नागरिक प्रभावित होते हैं, और ये एंबुलेंसें आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की रीढ़ को मजबूत करेंगी।

अफगानिस्तान में स्वास्थ्य ढांचा लंबे समय से संकट का सामना कर रहा है। दवाइयों, उपकरणों और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की भारी कमी के बीच यह एंबुलेंस खेप हजारों लोगों के लिए जीवनदाता साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, युद्धग्रस्त और आर्थिक रूप से प्रभावित क्षेत्रों में एंबुलेंस जैसी मूलभूत सुविधाएं लोगों के जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

इसके उलट, बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल और कट्टरपंथी समूहों के उभार ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा किया है। सीमा क्षेत्रों में उकसावे और भारत-विरोधी नारों की बढ़ती घटनाओं के बीच भारत ने संयम और धैर्य का परिचय दिया है। शरणार्थी संकट से निपटने में भी भारत ने स्थिति को शांत रखने का प्रयास किया। लेकिन भारत की विदेश नीति का मूल तत्व यह है कि वह ऐसे पड़ोसियों की सहायता को हमेशा प्राथमिकता देता है जो उसकी संप्रभुता का सम्मान करते हैं और आपसी सहयोग की भावना रखते हैं। अफगानिस्तान के साथ यह संबंध इसी सिद्धांत का उदाहरण है।

भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंध केवल कूटनीतिक या सामरिक नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित हैं। बुद्धकाल से चली आ रही सांस्कृतिक साझेदारी के बीच भारत आज भी काबुल और अन्य क्षेत्रों में सड़क, बांध, पुस्तकालय और स्कूल जैसी कई विकास परियोजनाएं चला रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एंबुलेंसों की यह खेप दोनों देशों के बीच मानवीय और विकासात्मक सहयोग को और गति देगी तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यापारिक अवसरों को भी मजबूत करेगी।

विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, “भारत संकटग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। अफगान भाइयों का कल्याण हमारे लिए प्राथमिकता है और यह सहयोग हमारे साझा भविष्य में विश्वास का प्रतीक है।” मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सहायता केवल स्वास्थ्य उपकरणों की आपूर्ति नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और मानवीय मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का संदेश भी है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह कदम न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की उस छवि को भी मजबूत करेगा जिसमें वह मानवता, सहयोग और सहायता के सिद्धांतों को सर्वोपरि रखता है। अफगानिस्तान में भारत की यह पहल संकेत देती है कि कठिन समय में भी भारत अपने मित्र देशों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता है—चाहे क्षेत्रीय राजनीतिक परिवर्तनों में कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों।

ANC Varta

About Author

You may also like

Trending ग्रामीण भारत

कुम्हड़ा के चमत्कारिक फायदे : आपकी थाली से सेहत तक का सफर

ANCवार्ता, दिल्ली कुम्हड़ा, जिसे आम बोलचाल में कद्दू कहा जाता है, हमारे किचन की सबसे सामान्य लेकिन सबसे ताक़तवर सब्ज़ियों
बिजनेस राजनीति राष्ट्रीय

GST परिषद का ऐतिहासिक फैसला: दूध-पनीर और रोटी टैक्समुक्त, घरेलू वस्तुओं पर घटा कर, लग्जरी प्रोडक्ट्स पर 40% तक टैक्स

  22 सितंबर से लागू होगी नई दो-स्तरीय टैक्स संरचना, आम आदमी को बड़ी राहत, उद्योग जगत को प्रोत्साहन और