सोशल मीडिया पोस्ट, जुलूसों और स्थानीय विवादों से जुड़े मामलों में हिंदू अल्पसंख्यक लगातार निशाने पर
ANC वार्ता, ब्यूरो, नई दिल्ली
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बांग्लादेश अल्पसंख्यक मानवाधिकार कांग्रेस (एचआरसीबीएम) की नई रिपोर्ट के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे कम से कम 71 मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट का कहना है कि ये घटनाएँ किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में फैलती हुई प्रवृत्ति का संकेत देती हैं।
एचआरसीबीएम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईशनिंदा से जुड़े मामले रंगपुर, चांदपुर, चटोग्राम, दिनाजपुर, लालमोनिरहाट, सुनामगंज, खुलना, कोमिला, गाजीपुर, तंगेल और सिलहट सहित 30 से अधिक जिलों में दर्ज किए गए। कई मामलों में न केवल धार्मिक आरोप लगाए गए, बल्कि हिंदू परिवारों पर हमले, तोड़फोड़ और लूटपाट जैसी घटनाएँ भी शामिल हैं।
संगठन के महासचिव रवींद्रनाथ घोष ने कहा, “ये आंकड़े केवल दिखाई देने वाला हिस्सा हैं। असल संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ित डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते।” रिपोर्ट में उल्लेख है कि कई घटनाएँ सोशल मीडिया पोस्ट, धार्मिक जुलूसों या स्थानीय विवादों से उपजीं, जिन्हें सांप्रदायिक रंग देकर ईशनिंदा का रूप दे दिया गया।
रिपोर्ट में कुछ प्रमुख घटनाओं का जिक्र है—चटोग्राम में एक युवक को फेसबुक पोस्ट के आधार पर भीड़ ने पीटा, जबकि सिलहट में एक मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया। कई जिलों में हिंदू परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इस रिपोर्ट पर चिंता जताई है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने बांग्लादेश सरकार से तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि ईशनिंदा के मामलों का दुरुपयोग अल्पसंख्यक समुदाय को दबाने और भय पैदा करने के लिए किया जा रहा है।
रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गठित अंतरिम सरकार पर कानून-व्यवस्था कमजोर होने के आरोप लग रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता और धार्मिक कट्टरपंथी संगठनों की बढ़ती सक्रियता ने अल्पसंख्यकों की स्थिति को और अधिक असुरक्षित बना दिया है।
भारत ने भी इन घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ढाका के साथ लगातार संपर्क में हैं। भारत सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा को लेकर हमेशा गंभीर रहा है।” मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया है।
एचआरसीबीएम ने अपनी रिपोर्ट में बांग्लादेश सरकार के लिए कई सिफारिशें की हैं, जिनमें ईशनिंदा कानूनों की समीक्षा, अल्पसंख्यक सुरक्षा के लिए विशेष बल का गठन, स्वतंत्र जांच और पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर दिया गया है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आग्रह किया है कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे पर सक्रिय हस्तक्षेप करे।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद दक्षिण एशिया में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन घटनाओं पर जल्द रोक नहीं लगी, तो यह क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

