साप्ताहिक स्तंभ लेख
डॉ. रामशंकर ‘विद्यार्थी’
भारत भाषाओं और संस्कृतियों का देश है, जहाँ प्रत्येक क्षेत्र अपनी विशिष्ट पहचान और परंपरा के साथ राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करता है। इसी बहुरंगी भारत के पूर्वोत्तर में स्थित अरुणाचल प्रदेश को लंबे समय तक एक दूरस्थ, सीमावर्ती और भाषायी रूप से जटिल प्रदेश के रूप में देखा जाता रहा है। यहाँ की जनजातीय विविधता, भौगोलिक कठिनाइयाँ और ऐतिहासिक अलगाव के कारण इसे प्रायः राष्ट्रीय विमर्श में कम स्थान मिला। किंतु इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में अरुणाचल प्रदेश एक नए रूप में सामने आ रहा है—हिन्दी उत्थान के एक सशक्त और प्रेरक प्रदेश के रूप में।
अरुणाचल प्रदेश में 25 से अधिक प्रमुख जनजातियाँ और अनेक उपजनजातियाँ निवास करती हैं, जिनकी अपनी-अपनी भाषाएँ, बोलियाँ और सांस्कृतिक परंपराएँ हैं। इतनी भाषायी विविधता के बीच आपसी संवाद एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में हिन्दी ने एक संपर्क भाषा (Link Language) के रूप में स्वाभाविक स्थान ग्रहण किया है। हिन्दी न तो यहाँ की स्थानीय भाषाओं की प्रतिद्वंद्वी बनी है और न ही उन पर थोपी गई है, बल्कि यह विभिन्न समुदायों को जोड़ने वाली एक सहज और स्वीकार्य भाषा के रूप में विकसित हुई है। यही कारण है कि आज हिन्दी अरुणाचल प्रदेश में सामाजिक संवाद, प्रशासनिक कार्य और शैक्षणिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर हिन्दी के प्रयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी कार्यालयों, पंचायत स्तर की बैठकों, जनसुनवाई कार्यक्रमों और विकास योजनाओं के प्रचार-प्रसार में हिन्दी का उपयोग आम होता जा रहा है। इससे एक ओर आम नागरिकों को सरकारी नीतियों और योजनाओं की स्पष्ट जानकारी मिलती है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और जनता के बीच संवाद की दूरी भी कम होती है। केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों—जैसे स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण—के संदेश हिन्दी के माध्यम से प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुँच रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में हिन्दी उत्थान की प्रक्रिया और भी अधिक सशक्त दिखाई देती है। विद्यालयी स्तर पर हिन्दी को एक विषय के रूप में पढ़ाए जाने के साथ-साथ इसे अभिव्यक्ति की भाषा के रूप में भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। हिन्दी निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, भाषण, कविता पाठ और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र-छात्राओं में आत्मविश्वास और रचनात्मकता विकसित हो रही है। उच्च शिक्षा संस्थानों में हिन्दी साहित्य, अनुवाद अध्ययन और जनसंचार जैसे विषयों में हिन्दी का प्रयोग बढ़ रहा है। इससे स्थानीय छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में हिन्दी केवल अध्ययन की भाषा नहीं, बल्कि विचार-विमर्श और अकादमिक संवाद का माध्यम बनती जा रही है। शोध पत्र, संगोष्ठियाँ और कार्यशालाएँ हिन्दी में आयोजित की जा रही हैं, जिससे ज्ञान का लोकतंत्रीकरण संभव हो रहा है। यह प्रवृत्ति इस बात का प्रमाण है कि हिन्दी अब केवल उत्तर भारत की भाषा न रहकर अखिल भारतीय बौद्धिक संवाद की भाषा बन रही है।
मीडिया और संचार के क्षेत्र में भी अरुणाचल प्रदेश में हिन्दी का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। आकाशवाणी और दूरदर्शन के हिन्दी कार्यक्रमों के साथ-साथ स्थानीय समाचार पत्र, पत्रिकाएँ और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म हिन्दी सामग्री को प्रमुखता दे रहे हैं। सोशल मीडिया के विस्तार ने युवाओं को हिन्दी में लिखने, बोलने और अपनी बात रखने का नया मंच प्रदान किया है। हिन्दी में ब्लॉग, वीडियो कंटेंट और समाचार साझा कर युवा न केवल सूचना का आदान-प्रदान कर रहे हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर रहे हैं।
हिन्दी उत्थान का यह दौर केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दे रहा है। हिन्दी के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोककथाएँ, लोकगीत, नृत्य और जनजातीय परंपराएँ देश के अन्य हिस्सों तक पहुँच रही हैं। इससे एक ओर स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है, वहीं दूसरी ओर हिन्दी भी स्थानीय रंगों से समृद्ध हो रही है। यह प्रक्रिया सांस्कृतिक समन्वय का एक सुंदर उदाहरण है, जहाँ विविधता को आत्मसात करते हुए एक साझा राष्ट्रीय चेतना का निर्माण हो रहा है।
महत्वपूर्ण यह है कि अरुणाचल प्रदेश में हिन्दी का प्रसार किसी प्रकार के भाषायी वर्चस्व या सांस्कृतिक दबाव के रूप में नहीं देखा जाता। यहाँ हिन्दी और स्थानीय भाषाएँ सहअस्तित्व के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही हैं। घर और समुदाय के स्तर पर जनजातीय भाषाएँ जीवंत हैं, जबकि हिन्दी सार्वजनिक जीवन और अंतर-समुदाय संवाद की भाषा बन रही है। यह संतुलन ही हिन्दी उत्थान की सबसे बड़ी शक्ति है, क्योंकि यह विविधता को बनाए रखते हुए एकता को सुदृढ़ करता है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता की दृष्टि से भी अरुणाचल प्रदेश में हिन्दी का बढ़ता प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। सीमावर्ती प्रदेश होने के कारण यहाँ राष्ट्रीय चेतना और संवाद की भूमिका और भी अधिक संवेदनशील हो जाती है। हिन्दी के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश का शेष भारत से भावनात्मक और बौद्धिक जुड़ाव मजबूत हुआ है। यह जुड़ाव केवल भाषा का नहीं, बल्कि विचार, मूल्य और साझा भविष्य का है।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि अरुणाचल प्रदेश आज हिन्दी उत्थान का नया प्रदेश बनकर उभर रहा है। यहाँ हिन्दी विकास, शिक्षा, प्रशासन, मीडिया और सांस्कृतिक संवाद की एक सशक्त कड़ी बन चुकी है। यह उत्थान न तो किसी भाषा के लिए खतरा है और न ही किसी संस्कृति के लिए चुनौती, बल्कि यह भारतीय बहुलता के भीतर समन्वय और सहअस्तित्व का आदर्श उदाहरण है। अरुणाचल प्रदेश की यह यात्रा बताती है कि हिन्दी जब संवेदनशीलता, सम्मान और सहभागिता के साथ आगे बढ़ती है, तो वह केवल भाषा नहीं रहती, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का सेतु बन जाती है।

