सेहतनामा: 40 के बाद 3 से 5% मसल्स होते कम — मसल्स बनाना क्यों है सबसे बड़ा हेल्थ इन्वेस्टमेंट, जानें 5 असरदार तरीके
ANC वार्ता, हेल्थ डेस्क
क्या आप जानते हैं कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की ताकत धीरे-धीरे कम होती जाती है? इसका सबसे बड़ा कारण है मसल्स यानी शरीर की पेशियों का घट जाना। 40 साल की उम्र के बाद हमारे शरीर में हर दशक में लगभग 3 से 5 प्रतिशत मसल्स कम हो जाते हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे होता है, लेकिन इसके प्रभाव पूरे शरीर पर दिखने लगते हैं — जैसे थकान, कमजोरी, कम बैलेंस, वजन बढ़ना, जोड़ों में दर्द और शुगर लेवल में असंतुलन।
इसीलिए आज फिटनेस एक्सपर्ट कहते हैं कि “मसल्स बिल्डिंग ही सबसे बड़ा हेल्थ इन्वेस्टमेंट है।”
क्या है मसल्स लॉस और क्यों होता है यह
मसल्स लॉस को मेडिकल भाषा में सार्कोपीनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। यह एक ऐसी प्राकृतिक प्रक्रिया है जो उम्र के साथ बढ़ती है। शरीर में टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन जैसे हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे मसल्स की ग्रोथ धीमी पड़ जाती है। इसके अलावा, जीवनशैली में बदलाव, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, खराब खानपान और नींद की कमी भी मसल्स लॉस को तेज कर देती है।
आंकड़ों के अनुसार, 40 के बाद हर दशक में औसतन 3–5% मसल्स कम होते हैं, और 60 के बाद यह दर और बढ़ जाती है। यही वजह है कि बुजुर्ग लोग अक्सर “कमज़ोर” या “ढीले” दिखने लगते हैं।
मसल्स सिर्फ ताकत नहीं, सेहत का आधार
मसल्स केवल शरीर की ताकत का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर कंट्रोल, हार्ट हेल्थ, और पोश्चर के लिए भी बेहद जरूरी हैं।
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मसल्स जितने मजबूत होंगे, शरीर उतनी ही अधिक कैलोरी जलाएगा — भले आप आराम की स्थिति में हों।
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ये ब्लड शुगर को नियंत्रित रखते हैं और डायबिटीज से बचाव करते हैं।
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मसल्स शरीर के जोड़ो और हड्डियों को सपोर्ट देते हैं, जिससे चोट लगने की संभावना कम होती है।
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स्ट्रॉन्ग मसल्स बैलेंस और स्थिरता बनाए रखते हैं, जो उम्र बढ़ने पर गिरने से बचाते हैं।
यानी अगर आप चाहते हैं कि आपकी उम्र बढ़े लेकिन कमजोरी न आए, तो मसल्स बिल्डिंग को अपनी प्राथमिकता बनाना ही होगा।
क्यों है मसल्स बनाना सबसे बड़ा हेल्थ इन्वेस्टमेंट
हम सभी जानते हैं कि लोग हेल्थ इंश्योरेंस में पैसे लगाते हैं ताकि बीमारी के समय मदद मिल सके। लेकिन अगर आप शरीर में “मसल्स” बनाते हैं, तो ये वही असली इंश्योरेंस है जो आपको बीमारी से पहले ही बचा लेता है।
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मजबूत मसल्स ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं।
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ये इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाते हैं, जिससे डायबिटीज का खतरा कम होता है।
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मसल्स शरीर के बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) को बनाए रखते हैं, जिससे उम्र बढ़ने पर भी वजन नियंत्रित रहता है।
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मसल्स इम्यून सिस्टम को भी सपोर्ट करते हैं, जिससे बीमारियां जल्दी नहीं होतीं।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर 40 की उम्र के बाद भी आप नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, तो आपकी मसल्स लॉस की दर 50% तक कम हो सकती है।
5 असरदार तरीके जिनसे मसल्स मजबूत बनाए जा सकते हैं
रेसिस्टेंस ट्रेनिंग करें
मसल्स बढ़ाने का सबसे कारगर तरीका है रेसिस्टेंस ट्रेनिंग यानी वजन उठाना।
आपको भारी वज़न उठाने की जरूरत नहीं — बस नियमित रूप से स्क्वैट्स, पुशअप्स, लंजेस, प्लैंक और डम्बल एक्सरसाइज जैसे वर्कआउट करें।
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शुरुआती लोग हफ्ते में 3 दिन 30-40 मिनट की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज से शुरुआत करें।
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धीरे-धीरे वज़न और रेप्स बढ़ाएं।
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ध्यान रखें कि मसल्स तभी बढ़ेंगे जब उन्हें “चैलेंज” मिलेगा।
प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं
मसल्स की ग्रोथ के लिए प्रोटीन सबसे ज़रूरी पोषक तत्व है।
डायटिशियनों के अनुसार, हर व्यक्ति को अपने वजन के प्रति किलो के हिसाब से 1.2–1.6 ग्राम प्रोटीन रोज़ लेना चाहिए।
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प्राकृतिक स्रोत: दूध, पनीर, अंडे, दालें, चना, मछली, चिकन, टोफू और सोया।
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दिनभर में प्रोटीन को छोटे हिस्सों में बाँटकर खाएं।
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प्रोटीन के साथ पर्याप्त पानी पिएं ताकि शरीर डिटॉक्स हो सके।
नींद पूरी करें
नींद सिर्फ थकान मिटाने के लिए नहीं होती — मसल्स की रिकवरी और ग्रोथ इसी दौरान होती है।
जब आप सोते हैं, तो शरीर ग्रोथ हार्मोन रिलीज़ करता है, जो मसल्स को रिपेयर करता है।
कम नींद लेने से न केवल मसल्स की ग्रोथ रुकती है, बल्कि तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो मसल्स को नुकसान पहुंचाता है।
👉 हर रात कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लें।
स्ट्रेस को नियंत्रित करें
लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन मसल्स टिश्यू को तोड़ता है और फैट स्टोर करता है।
योग, मेडिटेशन, गहरी साँस लेना, संगीत सुनना या प्रकृति में समय बिताना स्ट्रेस कम करने के आसान उपाय हैं।
याद रखें — मसल्स ग्रोथ सिर्फ जिम में नहीं, दिमाग की शांति से भी होती है।
सप्लिमेंट्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर ध्यान दें
कई बार भोजन से सभी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, खासकर 40 के बाद। इसलिए
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विटामिन D हड्डियों और मसल्स के लिए ज़रूरी है।
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ओमेगा-3 फैटी एसिड सूजन कम करता है और मसल्स प्रोटीन सिंथेसिस को बढ़ाता है।
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मैग्नीशियम और कैल्शियम मसल्स के संकुचन और रिलैक्सेशन में मदद करते हैं।
डॉक्टर की सलाह लेकर सप्लिमेंट्स लेना हमेशा सुरक्षित विकल्प है।
विशेषज्ञों की राय
फिटनेस ट्रेनर और हेल्थ कोच मानते हैं कि मसल्स बनाना केवल युवाओं के लिए नहीं है, बल्कि 40 के बाद यह और भी ज़रूरी हो जाता है।
दिल्ली के फिटनेस एक्सपर्ट डॉ. रमन ठाकुर कहते हैं,
“40 की उम्र के बाद हर व्यक्ति को अपने फिटनेस प्लान में वेट ट्रेनिंग शामिल करनी चाहिए। यह न सिर्फ मसल्स को मजबूत करता है बल्कि हार्ट और ब्रेन को भी हेल्दी रखता है।”
वहीं न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. मीना शर्मा का कहना है कि
“भारत में ज्यादातर लोग कार्बोहाइड्रेट ज्यादा और प्रोटीन कम खाते हैं। यह मसल्स लॉस का बड़ा कारण है। हर भोजन में प्रोटीन जरूर शामिल करें।”
महिलाओं के लिए भी जरूरी
अक्सर महिलाएं यह सोचकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से बचती हैं कि इससे शरीर भारी या मर्दाना दिखने लगेगा। जबकि हकीकत यह है कि
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वेट ट्रेनिंग महिलाओं में हड्डियों की घनता (Bone Density) बढ़ाती है,
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मेनोपॉज़ के बाद के हार्मोनल बदलावों से लड़ने में मदद करती है,
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और शरीर को टोन व फिट बनाए रखती है।
40 की उम्र के बाद महिलाएं अगर हल्के वज़न या योग-आधारित स्ट्रेंथ वर्कआउट करती हैं, तो मसल्स और ऊर्जा दोनों लंबे समय तक बनी रहती हैं।
“मसल्स हैं तो मेटाबॉलिज्म है, और मेटाबॉलिज्म है तो हेल्थ है”
मसल्स बनाना किसी मॉडल की तरह दिखने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
यह आपके शरीर का इंश्योरेंस है — जो आपको डायबिटीज, हृदय रोग, मोटापा और गिरने जैसी समस्याओं से बचाता है।
इसलिए अगर आप 40 की उम्र पार कर चुके हैं, तो आज से ही कदम उठाइए:
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एक्सरसाइज को रूटीन बनाइए,
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प्रोटीन को प्राथमिकता दीजिए,
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और स्ट्रेस को पीछे छोड़ दीजिए।
याद रखिए, मजबूत मसल्स = लंबी और स्वस्थ ज़िंदगी।
(सेहतनामा | विशेष रिपोर्ट | ANC पोर्टल)

