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अचला सप्तमी पर 40–50 लाख श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान

अचला सप्तमी पर 40–50 लाख श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान, मेला क्षेत्र नो-व्हीकल जोन

ANCवार्ता, ब्यूरो | प्रयागराज

अचला सप्तमी के पावन अवसर पर प्रयागराज में आस्था का विशाल सैलाब उमड़ने की संभावना है। मेला प्रशासन के अनुसार संगम सहित गंगा–यमुना के 24 से अधिक घाटों पर 40 से 50 लाख श्रद्धालु पुण्य स्नान करेंगे। वसंत पंचमी पर पहुंचे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या अभी भी माघ मेला क्षेत्र के शिविरों में ठहरी हुई है, जो अचला सप्तमी स्नान के बाद लौटेगी।

भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए रविवार सुबह 4 बजे से मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है। तय समय के बाद किसी भी प्रकार के निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। केवल एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को ही अनुमति दी जाएगी।

मेलाधिकारी ऋषिराज ने बताया कि महाराष्ट्र, बिहार, नेपाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत प्रदेश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए व्यापक तैयारियां की गई हैं। वहीं, एसपी नीरज पांडेय ने अपील की है कि श्रद्धालु अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़े करें। भीड़ नियंत्रण के लिए पांटून पुल संख्या 1 और 2 को रिजर्व रखा गया है।

पांटून पुलों की व्यवस्था

  • परेड → झूंसी: पांटून पुल 3, 5 और 7

  • झूंसी → परेड: पांटून पुल 4 और 6

प्रमुख पार्किंग एवं मार्ग

  • प्लॉट नंबर-17: काली मार्ग से अपर संगम मार्ग, हनुमान घाट, रामघाट; वापसी अक्षयवट खड़ंजा मार्ग से।

  • गल्ला मंडी: काली-दो मार्ग से मोरी रैंप, किलाघाट; वापसी ओल्ड जीटी रोड/रिवर फ्रंट से।

  • नागवासुकि: रिवर फ्रंट मार्ग से नागवासुकि घाट; वापसी रिवर फ्रंट से।

  • ओल्ड जीटी कछार: नागवासुकि मार्ग से पांटून पुल 4–5 के मध्य स्नान घाट; वापसी ओल्ड जीटी मार्ग से।

  • टीकरमाफी महुआबाग: जीटी रोड–त्रिवेणी मार्ग से पांटून पुल 2–3; वापसी काली मार्ग से।

  • सोहम आश्रम: रिवर फ्रंट–अक्षयवट मार्ग से पांटून पुल 1 के दक्षिणी ऐरावत घाट; वापसी झूंसी मार्ग से।

  • देवरख कछार: सोमेश्वर महादेव रैंप मार्ग; वापसी उसी मार्ग से।

  • गजिया/नवप्रयागम: अरैल बांध रोड से अरैल व चक्रमाधव घाट; वापसी निर्दिष्ट मार्गों से।

अचला सप्तमी का धार्मिक महत्व

माघ मास की सप्तमी को अचला सप्तमी कहा जाता है। इस दिन सूर्यदेव की विधिवत पूजा का विधान है। व्रत में मसूर की दाल, गाजर और नशीले पदार्थों के सेवन की मनाही बताई गई है। शनिवार को भी संगम तट पर श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में स्नान व दीपदान किया, हालांकि कोहरे के कारण सूर्यदेव के स्पष्ट दर्शन नहीं हो सके।

प्रशासन की अपील: श्रद्धालु निर्देशों का पालन करें, पैदल मार्गों का उपयोग करें और सुरक्षित, सुव्यवस्थित स्नान में सहयोग दें।

ANC Varta

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