ANCवार्ता, नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार दूसरे दिन भी हंगामा और नारेबाजी के कारण कामकाज ठप रहा। शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही दो बार शुरू होने के बावजूद कुल मिलाकर केवल 10 मिनट ही चल सकी। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी, पोस्टर लहराने और वॉकआउट के बीच लोकसभा को सोमवार 9 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया। वहीं राज्यसभा की कार्यवाही भी उतार-चढ़ाव भरे माहौल के बाद सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
शुक्रवार सुबह जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘नरेंदर-सरेंडर’ जैसे नारों से सदन गूंज उठा। निलंबित विपक्षी सांसद संसद परिसर में प्रदर्शन करते दिखे, जिनके हाथों में अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को ‘ट्रैप डील’ बताने वाले पोस्टर थे। पहली बार सदन करीब तीन मिनट और दूसरी बार सात मिनट तक ही चल सका। लगातार व्यवधान को देखते हुए पीठासीन अधिकारी ने लोकसभा को सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
राज्यसभा में स्थिति कुछ अलग रही। वहां कार्यवाही लगभग दो घंटे तक चली और शून्यकाल भी हुआ, लेकिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी रही। दोपहर में सदन को पहले 2 बजे तक और बाद में सोमवार 9 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश किए गए, हालांकि माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का बयान खासा चर्चा में रहा। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, “कल राहुल गांधी को सबने ‘बालक’ कहा। आज प्रधानमंत्री की पाठशाला थी, जिसमें बच्चों को बताया गया कि कैसे कामयाब होना है। अगर राहुल गांधी भी प्रधानमंत्री की पाठशाला में चले जाएं, तो जिंदगी में कामयाब हो जाएंगे।” बिट्टू का यह बयान उस विवाद की पृष्ठभूमि में आया, जिसमें राहुल गांधी ने उन्हें ‘गद्दार’ कहा था।
इस पर भाजपा सांसद शशांक मणि ने राहुल गांधी से माफी की मांग करते हुए कहा कि ‘गद्दार’ जैसे शब्द का इस्तेमाल निंदनीय है और इससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस पर 1984 के बाद से सिखों की उपेक्षा का आरोप भी लगाया।
विपक्ष की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सुरक्षा कारणों का हवाला देकर प्रधानमंत्री द्वारा लोकसभा में भाषण न देना, सभी सांसदों को असुरक्षित महसूस कराने जैसा है। वहीं कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने तंज कसते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री को 56 इंच के सीने वाला नेता कहा जाता है, तो फिर लोकसभा में भाषण देने से परहेज क्यों किया जा रहा है।
शिवसेना सांसद नरेश म्हास्के ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के बजाय पोस्टर दिखाकर सुर्खियों में रहना चाहता है। दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्रियों ने देश के लिए जो योगदान दिया है, उसे स्वीकार करना भी सत्तापक्ष को सीखना चाहिए।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा ने कांग्रेस को गाली देने के अलावा कुछ नहीं किया। उन्होंने सिख समुदाय के प्रति कांग्रेस के सम्मान को दोहराया और कहा कि मनमोहन सिंह जैसे नेता पार्टी की विरासत हैं।
गौरतलब है कि गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव हंगामे के बीच पारित कर दिया गया था। यह 2004 के बाद पहली बार हुआ, जब लोकसभा में यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना पारित हुआ। राज्यसभा में हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ था।
बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलना है, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा। कुल 65 दिनों में 30 बैठकें प्रस्तावित हैं। लोकसभा में इस समय नौ विधेयक लंबित हैं, जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 और प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 प्रमुख हैं।
लगातार हंगामे और स्थगन के बीच संसद की कार्यवाही ठप रहने से विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है। सत्तापक्ष जहां विपक्ष पर सदन बाधित करने का आरोप लगा रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है। अब निगाहें सोमवार पर टिकी हैं, जब लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही दोबारा शुरू होनी है और यह देखना होगा कि क्या गतिरोध टूट पाता है या हंगामे का सिलसिला जारी रहता है।

