मुकेश अंबानी का हैरान करने वाला दावा; बोले—पैसा बनाना है तो शेयर बाजार में लगाइए
ANCवार्ता, नई दिल्ली। जब सोने–चांदी की कीमतें एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं और वैश्विक अनिश्चितता के बीच लोग इन्हें सबसे सुरक्षित निवेश मान रहे हैं, उसी वक्त देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी ने निवेश को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन ने साफ कहा कि सोने–चांदी में पैसा ‘पार्क’ करना समझदारी नहीं है। अगर असली दौलत बनानी है, तो निवेश का रास्ता शेयर बाजार और उत्पादक संपत्तियों से होकर जाता है।
मुकेश अंबानी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब आम निवेशक महंगाई, युद्ध और वैश्विक मंदी की आशंका के कारण कीमती धातुओं की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। लेकिन अंबानी ने इस पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए कहा कि भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश में वेल्थ क्रिएशन का सबसे मजबूत माध्यम कैपिटल मार्केट है।
‘75 अरब डॉलर ऐसी चीजों में लॉक हो गए’
JioBlackRock की पहल पर बात करते हुए अंबानी ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उनके अनुसार, पिछले साल भारत ने करीब 60 अरब डॉलर का सोना और 10–15 अरब डॉलर की चांदी आयात की। यानी कुल मिलाकर लगभग 75 अरब डॉलर ऐसी परिसंपत्तियों में फंसे, जो सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था में उत्पादन नहीं बढ़ातीं।
अंबानी ने कहा, “सोना–चांदी सुरक्षा का एहसास जरूर देते हैं, लेकिन वे विकास की रफ्तार नहीं बढ़ाते। ये वैल्यू को प्रिज़र्व कर सकते हैं, लेकिन नई वैल्यू पैदा नहीं करते।” उनका तर्क था कि इतनी बड़ी राशि अगर प्रोडक्टिव एसेट्स में जाती, तो उसका असर देश की ग्रोथ और रोजगार दोनों पर साफ दिखता।
‘पैसा तिजोरी में नहीं, अर्थव्यवस्था में काम आए’
मुकेश अंबानी ने भारतीय निवेशकों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि बचत का बड़ा हिस्सा अगर पूंजी बाजारों में लगाया जाए, तो वही पैसा कंपनियों, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में लगेगा। इससे कारोबार बढ़ेंगे, नई नौकरियां बनेंगी और निवेशकों की संपत्ति भी लंबे समय में कई गुना हो सकती है।
उन्होंने कहा, “पैसा अगर तिजोरी में बंद रहेगा, तो वह सुरक्षित तो रहेगा, लेकिन देश और निवेशक—दोनों के लिए काम का नहीं होगा। पैसा अर्थव्यवस्था में घूमेगा, तभी विकास होगा।” अंबानी का मानना है कि शेयर बाजार केवल सट्टा नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा में भागीदारी का माध्यम है।
सोना–चांदी बनाम शेयर बाजार
अंबानी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सोने–चांदी को पूरी तरह बेकार नहीं बता रहे हैं। उनके मुताबिक, कीमती धातुएं संकट के समय मूल्य को बचाने का काम करती हैं, लेकिन लंबी अवधि में दौलत बनाने की क्षमता सीमित होती है। इसके उलट, शेयर बाजार में निवेश कंपनियों की ग्रोथ से जुड़ा होता है। जब कंपनियां बढ़ती हैं, मुनाफा कमाती हैं और विस्तार करती हैं, तो निवेशक भी उसी अनुपात में समृद्ध होते हैं।
‘भारत एक फलदार पेड़ की तरह’
अपने संबोधन में अंबानी ने भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना “फलदार पेड़” से की। उन्होंने कहा कि स्थिर नीतियां, मजबूत नेतृत्व और लगातार सुधारों के कारण भारत दुनिया के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। अंबानी का दावा है कि भारत 8–10 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर हासिल करने में सक्षम है और इसे लंबे समय तक बनाए भी रख सकता है।
उन्होंने कहा कि JioBlackRock का लक्ष्य सिस्टम को रातोंरात बदलना नहीं है, बल्कि लाखों भारतीयों के लिए निवेश को आसान, सुलभ और भरोसेमंद बनाना है, ताकि आम लोग भी शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड जैसे माध्यमों से देश की ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बन सकें।
डर नहीं, दूरदृष्टि जरूरी
अंबानी के बयान का सार यही है कि डर के माहौल में सोना खरीदना आसान विकल्प है, लेकिन भविष्य की असली दौलत दूरदृष्टि और धैर्य से बनती है। उनका मानना है कि भारत जैसे उभरते देश में पूंजी को काम पर लगाना ही सबसे समझदारी भरा फैसला है।
साफ शब्दों में कहें तो मुकेश अंबानी ने निवेशकों को यह संदेश दिया है कि अगर सिर्फ पैसा बचाना है तो सोना–चांदी ठीक हैं, लेकिन अगर असली वेल्थ क्रिएशन चाहिए, तो शेयर बाजार और प्रोडक्टिव एसेट्स का कोई विकल्प नहीं।

