फर्स्ट वोट से फ्यूचर स्टार्टअप तक… ‘मन की बात’ में युवाओं से दिल से बोले पीएम मोदी
ANCवार्ता, ब्यूरो, नई दिल्ली।
गणतंत्र दिवस से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मन की बात सिर्फ एक रेडियो संबोधन नहीं लगा, बल्कि ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई बुज़ुर्ग अपने घर के युवाओं से सीधे संवाद कर रहा हो।
130वें एपिसोड का संयोग राष्ट्रीय मतदाता दिवस से जुड़ा था, और शायद यही वजह रही कि पूरी बातचीत का केंद्र युवा और उनका भविष्य रहा।
पहला वोट: सिर्फ फॉर्म नहीं, एक यादगार पल
पीएम मोदी ने बड़ी सादगी से कहा कि जब कोई युवा 18 साल का होकर पहली बार वोटर बनता है, तो यह सिर्फ नाम जुड़ने की प्रक्रिया नहीं होती—यह जिम्मेदारी का पहला कदम होता है।
उन्होंने यहां तक कहा कि पहली बार वोटर बनने पर उसे उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए।
मोहल्ला हो या गांव, नए मतदाता का स्वागत हो, मिठाई बंटे, उसे यह एहसास कराया जाए कि देश को उसकी ज़रूरत है।
यह बात सीधे उन युवाओं से जुड़ती है, जो अक्सर सोचते हैं—
“एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा?”
वोट देना: अधिकार भी, भरोसा भी
प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि वोट देना सिर्फ संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि देश के साथ किया गया एक वादा है।
उन्होंने माना कि बीते वर्षों में मतदान प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन शहरी इलाकों और युवाओं में अब भी दूरी बनी हुई है।
उनका संदेश सीधा था—
अगर आप देश की दिशा पर राय रखते हैं, तो मतदान से दूरी नहीं बना सकते।
स्टार्टअप इंडिया: सपनों को ज़मीन देने वाली पीढ़ी
‘मन की बात’ का दूसरा हिस्सा युवाओं के सपनों और हुनर पर केंद्रित रहा।
पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
AI, स्पेस, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक—ऐसे क्षेत्र जिनका नाम कभी किताबों में भी मुश्किल से मिलता था, आज वहां भारतीय युवा काम कर रहे हैं।
यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं थी, बल्कि उस पीढ़ी की पहचान थी जो नौकरी ढूंढने से आगे बढ़कर नौकरी देने वाली बन रही है।
‘चलता है’ की आदत छोड़नी होगी
सबसे सख्त, लेकिन सबसे ज़रूरी बात गुणवत्ता को लेकर आई।
पीएम मोदी ने दो टूक कहा—
अब ‘चलता है’ नहीं चलेगा।
चाहे कपड़ा हो, तकनीक हो या पैकेजिंग—भारतीय उत्पादों को ऐसा होना चाहिए कि दुनिया उन्हें गुणवत्ता की मिसाल माने।
यह सिर्फ फैक्ट्रियों का नहीं, बल्कि सोच बदलने का संदेश था।
परिवार और साथ: भारत की असली ताकत
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने परिवार और समाज की बात की।
यूएई द्वारा 2026 को ‘ईयर ऑफ द फैमिली’ घोषित करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।
गुजरात के एक गांव की सामुदायिक रसोई का उदाहरण देकर उन्होंने याद दिलाया कि
साथ चलना, साथ खाना और साथ खड़ा होना—यही भारत की असली पहचान है।
आख़िर में बात साफ है…
इस ‘मन की बात’ में पीएम मोदी का संदेश कोई नारा नहीं था।
वह युवाओं से कह रहे थे—
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लोकतंत्र में हिस्सा लो
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सपनों से मत डरो
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काम में गुणवत्ता रखो
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और रिश्तों को मत भूलो
यानी भारत का भविष्य सिर्फ नीतियों से नहीं, आपसे बनेगा।

