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सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर लगाई रोक, बेटी का भावुक खुला पत्र सामने आया

ANC वार्ता, ब्यूरो, नई दिल्ली

उन्नाव बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत मिलने से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए उनकी जमानत पर रोक लगा दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले दिनों सेंगर को जमानत देने का आदेश दिया था, लेकिन देश के सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की “विशेष परिस्थितियों” का हवाला देकर इस निर्णय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया। इस फैसले ने न सिर्फ कानूनी हलकों, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी नई बहस छेड़ दी है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: ‘विशेष परिस्थितियों’ का हवाला

मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट किसी दोषी या विचाराधीन कैदी को सुने बिना हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक नहीं लगाता।
लेकिन सेंगर के मामले में अदालत ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर इशारा किया—उन्हें धारा 304-II (गैर-इरादतन हत्या) के तहत भी दोषी ठहराया गया है, जो पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़ा मामला है।

पीठ ने कहा:
हम इस सिद्धांत के प्रति सजग हैं कि ऊपरी अदालतें बिना आरोपी को सुने जमानत आदेश पर रोक नहीं लगातीं, लेकिन यह मामला विशेष परिस्थितियों वाला है। इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर सेंगर रिहा नहीं किए जाएंगे।”

यह टिप्पणी दर्शाती है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को अब भी बेहद गंभीर मानता है और जमानत को लेकर अधिक सतर्क दृष्टिकोण अपना रहा है।

सेंगर की बेटी का खुला पत्र—’न्याय प्रणाली पर भरोसा टूट गया’

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद सेंगर की बेटी ने एक भावुक खुला पत्र जारी किया, जिसने सोशल मीडिया पर त्वरित प्रतिक्रिया बटोरी।
पत्र में उन्होंने अदालत के फैसले पर गहरा आक्रोश और निराशा जताई। उन्होंने लिखा:

  • यह फैसला “जनता के आक्रोश” को ध्यान में रखकर दिया गया है, न्याय के सिद्धांतों पर नहीं।
  • उनका परिवार पिछले आठ वर्षों से न्याय के इंतजार में टूट चुका है।
  • उन्हें लगातार सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही हैं।
  • उनकी पहचान सिर्फ “भाजपा विधायक की बेटी” तक सीमित कर दी गई है, जिससे वह मानसिक दबाव में हैं।

पत्र में भावनाओं की तीव्रता साफ झलकती है और यह भी कि सेंगर परिवार सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से बेहद निराश है।

उन्नाव कांड: देश को झकझोर देने वाली घटना

2017 में सामने आए उन्नाव बलात्कार कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन भाजपा विधायक सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था। मामला विवादास्पद तब हुआ जब पीड़िता के पिता की हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

  • 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया।
  • मुकदमे को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित किया गया।
  • 2020 में दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने बलात्कार मामले में सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
  • इसके बाद से सेंगर जेल में है और लगातार जमानत की कोशिश कर रहा है।

यह मामला उस दौर में राजनीतिक तूफान का कारण बना था और एक बार फिर यह फैसला चर्चाओं के केंद्र में है।

हाईकोर्ट का आदेश, सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में सेंगर को जमानत देने का आदेश दिया था, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्लेटफ़ॉर्म पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
कई महिला संगठनों, अधिकार समूहों और पीड़िता से जुड़े लोगों ने इस आदेश पर आपत्ति जताई थी।
ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट का त्वरित हस्तक्षेप सामने आया।

सोशल मीडिया में ध्रुवीकरण तेज

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सेंगर की बेटी के खुले पत्र के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
एक वर्ग कोर्ट के सख्त रुख की सराहना कर रहा है, तो दूसरा इसे ‘राजनीतिक दबाव’ का परिणाम बता रहा है।
सेंगर समर्थक और आलोचक—दोनों पक्षों की टिप्पणियां तेज़ हो गई हैं, जिससे मुद्दा फिर से राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गया है।

कुलदीप सिंह सेंगर पर सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कानूनी लड़ाई को लंबा खींच सकता है।
मामले के संवेदनशील इतिहास, पीड़िता के परिवार की पीड़ा और आरोपी की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए यह फैसला आने वाले दिनों में भी सुर्खियों में रहेगा।

साथ ही, सेंगर की बेटी के दर्दभरे पत्र ने इस नाज़ुक मामले के मानवीय आयाम को एक बार फिर सबके सामने रख दिया है—जहाँ न्याय, राजनीति और सामाजिक भावना एक-दूसरे से टकराते हुए दिखाई दे रहे हैं।

 

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