डॉ. अनुज, स्तम्भ | ANC वार्ता
मिज़ोरम भारत का एक छोटा लेकिन सामाजिक रूप से अत्यंत विकसित पूर्वोत्तर राज्य है। लगभग 11–12 लाख की कुल जनसंख्या वाला यह राज्य अपनी शांत, अनुशासित और संवेदनशील सामाजिक संरचना के लिए जाना जाता है। इसकी राजधानी आईज़ॉल में ही करीब 4–5 लाख लोग निवास करते हैं। संख्या भले ही भारत के महानगरों की तुलना में कम प्रतीत हो, लेकिन पहाड़ी भूगोल और सीमित शहरी विस्तार के कारण आईज़ॉल में जनसंख्या घनत्व काफी अधिक है। इसी वजह से यहाँ की यातायात व्यवस्था (ट्रैफिक सिस्टम) अकसर चर्चा का विषय बनती रहती है और कई बार सोशल मीडिया पर भी उदाहरण के रूप में सामने आती है।
आईज़ॉल की सड़कें पहाड़ियों पर बसी हैं, जो स्वाभाविक रूप से संकरी, घुमावदार और ढलानयुक्त हैं। ऐसे में वाहनों की बढ़ती संख्या ट्रैफिक प्रबंधन को चुनौतीपूर्ण बना देती है। इसके बावजूद, मिज़ोरम का यातायात तंत्र देश के कई बड़े शहरों के लिए एक सीख बन सकता है—खासकर नागरिक अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के दृष्टिकोण से।
नागरिक बोध की मजबूत नींव
चार वर्ष मिज़ोरम में बिताने के बाद यह बात पूरे विश्वास के साथ कही जा सकती है कि यहाँ के लोगों का नागरिक बोध अत्यंत विकसित है। बचपन से ही उन्हें नियम-कानून, सामाजिक मर्यादा और सार्वजनिक व्यवहार की जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया जाता है। यह नागरिक चेतना केवल ट्रैफिक नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के हर पहलू में दिखाई देती है—चाहे वह कूड़ा निर्धारित स्थान पर फेंकना हो, सार्वजनिक स्थानों पर शांति बनाए रखना हो या दूसरों की सुविधा का ध्यान रखना हो।
यही कारण है कि मिज़ोरम में प्रशासन और समाज के बीच टकराव नहीं, बल्कि सहयोग का वातावरण देखने को मिलता है। यहाँ हर नागरिक स्वयं को व्यवस्था का एक जिम्मेदार हिस्सा मानता है।
हॉर्न नहीं, धैर्य की आवाज़
मिज़ोरम में वाहन चलाते समय बेवजह हॉर्न बजाना अशिष्ट व्यवहार माना जाता है। जब तक कोई अत्यंत आवश्यक स्थिति न हो, लोग हॉर्न का प्रयोग नहीं करते। यदि किसी वाहन को पास देना हो तो डिपर का उपयोग किया जाता है और धन्यवाद के संकेत के रूप में केवल एक हल्का-सा हॉर्न दिया जाता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में जहाँ हॉर्न न बजाना विवाद का कारण बन सकता है, वहीं मिज़ोरम में अनावश्यक हॉर्न बजाना ही असभ्यता समझा जाता है।
यहाँ तक कि लंबे ट्रैफिक जाम में भी लोग धैर्य बनाए रखते हैं। शोर, गाली-गलौज या आक्रोश दुर्लभ है। यह व्यवहार न केवल ट्रैफिक को सहज बनाता है, बल्कि शहर के सामाजिक माहौल को भी शांत और सौम्य रखता है।
ट्रैफिक जाम और उसका समाधान
आईज़ॉल में ट्रैफिक जाम एक वास्तविक समस्या है, विशेषकर कार्यालय समय के दौरान। बड़े बाज़ार, टेम्पल और चानमारी जैसे इलाके अक्सर जाम से जूझते हैं। यह समस्या इतनी गंभीर रही है कि चुनावों में भी ट्रैफिक एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है।
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एक अनूठी रोटेशनल वाहन प्रतिबंध व्यवस्था लागू की है—
-
सोमवार: 1 या 2 पर समाप्त होने वाले वाहन
-
मंगलवार: 3 या 4
-
बुधवार: 5 या 6
-
गुरुवार: 7 या 8
-
शुक्रवार: 9 या 0
-
शनिवार–रविवार: कोई प्रतिबंध नहीं
इस व्यवस्था से कार्यदिवसों में वाहनों का दबाव काफी हद तक नियंत्रित रहता है और शहर की सड़कों पर संतुलन बना रहता है।
पार्किंग और वाहन खरीद के नियम
पहाड़ी ढाँचे के कारण बड़े पार्किंग स्थल बनाना यहाँ बेहद कठिन है। इसलिए अधिकांश जगह सड़क किनारे सीमित पार्किंग ही उपलब्ध है। इसी कारण शहर में ऑटो रिक्शा के प्रवेश पर प्रतिबंध है, ताकि यातायात की गति बाधित न हो।
नया वाहन खरीदने के लिए भी मिज़ोरम में अनुशासन आधारित नियम लागू हैं। वाहन खरीदने से पहले स्थानीय प्रशासन या लोकल काउंसिल से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है। यह प्रमाणपत्र उसी स्थान से जारी होता है जहाँ वाहन पार्क किया जाना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन के लिए पर्याप्त पार्किंग उपलब्ध हो और अनावश्यक वाहन संख्या न बढ़े।
हेलमेट और ओवरटेकिंग का शिष्टाचार
मिज़ोरम में हेलमेट पहनना अनिवार्य है और लोग इसे स्वाभाविक आदत के रूप में अपनाते हैं। बिना हेलमेट वाहन चलाना सामाजिक रूप से भी अस्वीकार्य माना जाता है। लोग अक्सर एक-दूसरे को विनम्रता से हेलमेट पहनने की याद दिला देते हैं।
यहाँ दोपहिया वाहन दाईं ओर से ओवरटेक करते हैं। बाईं ओर से ओवरटेक करना अशिष्ट व्यवहार माना जाता है। यह नियम केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक शिष्टाचार का हिस्सा बन चुका है।
टैक्सी संस्कृति और गूगल मैप की सीमाएँ
मिज़ोरम में टैक्सी का उपयोग बहुत आम है। दोपहिया और चारपहिया—दोनों प्रकार की टैक्सियाँ प्रचलन में हैं। अब तक यहाँ कोई विशेष टैक्सी ऐप सेवा उपलब्ध नहीं है। हालाँकि गूगल मैप दिशा बताने में सहायक है, लेकिन आईज़ॉल जैसे शहर में यह हमेशा व्यावहारिक नहीं होता।
वन-वे सड़कें, समय-आधारित मार्ग परिवर्तन और अस्थायी दिशा-निर्देश गूगल मैप को सीमित बना देते हैं। ऐसे में टैक्सी चालक अपने अनुभव और स्थानीय ज्ञान के आधार पर यात्रियों को सही मार्ग से ले जाते हैं।
सफेद पट्टी का अनुशासन
आईज़ॉल की सड़कों पर अक्सर कंक्रीट डिवाइडर नहीं होते। केवल सफेद पट्टी से सड़क के दोनों ओर की दिशा निर्धारित की जाती है। आश्चर्यजनक बात यह है कि लोग इस पट्टी का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं। चाहे विपरीत दिशा की सड़क खाली ही क्यों न हो, लोग नियम नहीं तोड़ते।
इसके पीछे दो कारण हैं—मजबूत नागरिक बोध और ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता। यही कारण है कि ऐसी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अक्सर मिसाल के रूप में वायरल होती हैं।
सीढ़ियाँ, ट्रैफिक और सामूहिक जिम्मेदारी
आईज़ॉल में सड़कों के साथ-साथ सीढ़ियों का भी एक विशाल नेटवर्क है, जो पैदल यात्रियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। कई सीढ़ियाँ एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी को जोड़ती हैं, जिससे पैदल चलना आसान और आनंददायक हो जाता है।
यहाँ ट्रैफिक पुलिस अत्यंत मुस्तैदी से काम करती है। भूस्खलन जैसी आपात स्थितियों में आम नागरिक और सिविल सोसायटी भी ट्रैफिक प्रबंधन में सहयोग करती है। बिना हेलमेट या ओवरलोड वाहन यहाँ असामान्य हैं।
आईज़ॉल यह दिखाता है कि भौगोलिक सीमाओं और संरचनात्मक चुनौतियों के बावजूद अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी से व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। यहाँ कानून से अधिक लोक-लाज और आत्म-संयम व्यवस्था को संचालित करते हैं। यही कारण है कि मिज़ोरम का यातायात तंत्र केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि एक सामाजिक संस्कृति बन चुका है—शांत, संवेदनशील और मानवीय।

