राजनीति राष्ट्रीय

सीपी राधाकृष्णन बने देश के नए उपराष्ट्रपति

 152 मतों से जीत, विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को हार

ANC वार्ता ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च पदों में से एक, उपराष्ट्रपति का चुनाव मंगलवार को संपन्न हुआ, जिसके नतीजे देर शाम घोषित किए गए। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत दर्ज करते हुए देश के नए उपराष्ट्रपति बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से हराया।

मतदान और परिणाम

उपराष्ट्रपति पद के लिए संसद भवन परिसर में आयोजित मतदान में सांसदों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुल 767 मतों में से 752 वैध घोषित किए गए, जबकि 15 मत अवैध पाए गए।

  • सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले।

  • बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए।

इस तरह राधाकृष्णन ने स्पष्ट बहुमत के साथ जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के अनुसार इस बार मतदान प्रतिशत 98% रहा, जो संसदीय चुनावी परंपरा में एक उच्चतम आंकड़ा माना जाता है।

प्रक्रिया और माहौल

मतदान मंगलवार सुबह शुरू होकर शाम पांच बजे तक चला। इसके बाद शाम छह बजे मतगणना प्रारंभ हुई और कुछ ही घंटों में परिणाम सामने आ गया। मतदान के दौरान संसद भवन के वातावरण में लोकतांत्रिक उत्साह साफ झलक रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले मतदान किया। उनके साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ नेता भी शुरुआती मतदाताओं में शामिल रहे।

मतदान करने वालों में प्रमुख नेताओं के नाम थे—

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

  • कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी

  • पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा

  • समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव

  • कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा

  • एनसीपी प्रमुख शरद पवार

  • एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी

यहां तक कि जेल में बंद सांसद इंजीनियर रशीद को भी मतदान की अनुमति दी गई, जो भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और समावेशी प्रकृति को दर्शाता है।

सुदर्शन रेड्डी की प्रतिक्रिया

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने हार को स्वीकार किया और राधाकृष्णन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा—
“मैं नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को उनके कार्यकाल की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं देता हूं। हालांकि परिणाम मेरे पक्ष में नहीं है, लेकिन वैचारिक लड़ाई और भी अधिक जोश और संकल्प के साथ जारी रहेगी।”

उनके इस बयान से साफ झलकता है कि विपक्ष इस हार से निराश नहीं है, बल्कि अपनी राजनीतिक विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस का दावा और सहयोगी दलों का रुख

कांग्रेस ने चुनाव से पहले दावा किया था कि उनके उम्मीदवार रेड्डी को 315 सांसदों का समर्थन मिलेगा। हालांकि परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि कई सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की।

वहीं, बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) और बीजेडी (बीजू जनता दल) ने इस चुनाव से दूरी बनाए रखी। राज्यसभा में बीआरएस के 4 और बीजेडी के 7 सांसद हैं, लेकिन उन्होंने मतदान नहीं किया। अकाली दल के सांसद ने भी बाढ़ की परिस्थितियों का हवाला देते हुए मतदान से इनकार कर दिया।

पूर्व उपराष्ट्रपति का इस्तीफा और चुनाव की पृष्ठभूमि

यह चुनाव समय से पहले इसलिए कराया गया क्योंकि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनके कार्यकाल में अभी दो साल बाकी थे। धनखड़ ने अपने कार्यकाल के दौरान सक्रिय और स्पष्टवादी उपराष्ट्रपति की छवि बनाई थी। उनके इस्तीफे के बाद यह चुनाव आवश्यक हो गया।

दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से

दिलचस्प बात यह रही कि इस बार दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से थे।

  • सीपी राधाकृष्णन: तमिलनाडु से आते हैं और गौंडर समुदाय (एक प्रमुख ओबीसी जाति) से संबंध रखते हैं।

  • बी. सुदर्शन रेड्डी: तेलंगाना से हैं और लंबे समय से विपक्ष की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर

सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर बेहद लंबा और सक्रिय रहा है।

  • वे 1998 में पहली बार कोयंबटूर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।

  • 1999 में उन्होंने इसी सीट से पुनः जीत हासिल की।

  • 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया।

  • जुलाई 2024 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

राधाकृष्णन का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से रहा है और उन्हें संगठनात्मक कार्यों में उनकी सक्रियता के लिए जाना जाता है।

राज्यपाल के रूप में शैली

अपने पूर्ववर्ती धनखड़ की तुलना में राधाकृष्णन ने राज्यपाल रहते हुए सार्वजनिक तौर पर विवादास्पद राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी करने से परहेज किया। उनकी कार्यशैली संतुलित और व्यावहारिक मानी जाती है, जिसने उन्हें सर्वसम्मति से स्वीकार्य नेता के रूप में स्थापित किया।

नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा—
“सीपी राधाकृष्णन जी को देश का नया उपराष्ट्रपति चुने जाने पर हार्दिक बधाई। उनके अनुभव और संतुलित नेतृत्व से लोकतांत्रिक संस्थाएं और मजबूत होंगी।”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी बयान जारी कर कहा कि विपक्षी उम्मीदवार की हार के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया ने यह दिखाया है कि संसद की एकजुटता भारत की ताकत है।

राजनीतिक महत्व

यह जीत एनडीए के लिए बड़ी सफलता है। उपराष्ट्रपति केवल राज्यसभा के सभापति ही नहीं होते, बल्कि संसद की कार्यवाही के सुचारू संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में राधाकृष्णन की जीत से मोदी सरकार को विधायी कार्यों में अतिरिक्त मजबूती मिलेगी।

वहीं विपक्ष के लिए यह परिणाम एक संकेत है कि उन्हें संसद में अपनी रणनीति और गठबंधन की राजनीति को और मजबूत करना होगा।

भविष्य की चुनौतियाँ

नए उपराष्ट्रपति के रूप में राधाकृष्णन के सामने कई चुनौतियाँ होंगी—

  1. राज्यसभा का सुचारू संचालन: जहां अक्सर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति रहती है।

  2. संतुलन बनाए रखना: उन्हें अपनी निष्पक्षता और गरिमा से सदन की कार्यवाही को नियंत्रित करना होगा।

  3. राजनीतिक संवाद का स्तर सुधारना: संसद में बढ़ती बहस और शोरगुल को संयमित करने में उनकी भूमिका अहम होगी।

सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना केवल एनडीए की जीत नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति में दक्षिण भारत के बढ़ते प्रभाव का भी प्रतीक है। उनका अनुभव, संगठनात्मक पृष्ठभूमि और संतुलित कार्यशैली उन्हें इस संवैधानिक पद की गरिमा निभाने में मदद करेगी।

अब पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि वह संसद के ऊपरी सदन के संचालन में किस तरह अपनी भूमिका निभाते हैं और भारतीय लोकतंत्र की मजबूती में नया अध्याय जोड़ते हैं।

ANC Varta

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