ANC वार्ता, ब्यूरो, अयोध्या। अयोध्या नगरी शुक्रवार को एक विशेष अवसर की गवाह बनी जब भूटान के प्रधानमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। उनकी यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक गहरा करने वाली मानी जा रही है।
पारंपरिक स्वागत और विशेष पूजन
अयोध्या आगमन पर भूटान के प्रधानमंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। मंदिर के पुजारियों और अधिकारियों ने उन्हें मंदिर परिसर में ले जाकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कराई। प्रधानमंत्री ने रामलला के समक्ष दीप प्रज्वलित किया और विशेष आरती में भाग लिया। इस दौरान उन्हें रामलला का प्रसाद और स्मृति चिह्न भी भेंट किया गया।
मंदिर की भव्यता की सराहना
भूटान के प्रधानमंत्री ने मंदिर की आध्यात्मिक आभा और स्थापत्य की भव्यता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अयोध्या आना और श्रीरामलला के दर्शन करना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है। उन्होंने इसे भारत-भूटान के साझा सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बताया।
भारत-भूटान संबंधों की मजबूती
भूटान और भारत के बीच रिश्ते सदियों से मित्रतापूर्ण रहे हैं। धर्म, संस्कृति और परंपराएं दोनों देशों को एक साझा धरोहर से जोड़ती हैं। भूटान के प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत और भूटान क्षेत्रीय सहयोग और आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। अयोध्या की यात्रा को दोनों देशों के बीच धार्मिक कूटनीति के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
साधु-संतों से मुलाकात
दर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने अयोध्या के साधु-संतों और मंदिर के महंतों से भी भेंट की। संतों ने उन्हें अयोध्या की ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर स्थानीय श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे और उन्होंने भूटान के प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।
भूटान के प्रधानमंत्री की यह अयोध्या यात्रा भारत और भूटान के बीच बढ़ते सांस्कृतिक व आध्यात्मिक संबंधों का प्रमाण है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में उनके दर्शन ने दोनों देशों की ऐतिहासिक निकटता को नई ऊर्जा दी है। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह बताती है कि किस प्रकार आध्यात्मिक धरोहरें अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी मजबूत कर सकती हैं।

